Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Feb 2023 · 1 min read

■ साहित्यपीडिया से सवाल

■ बताओ तो…!!
जितने महानुभाव आपकी तथाकथित “ट्रंडिंग” के “टॉप-5” में लगातार बने हुए हैं, वो कौन से वेद की ऋचाएं या अमर कथाएं लिख रहे हैं? पता तो चले कम से कम। मानदंड क्या हैं आपके…?
मुझे लगता है कि यह एक सवाल उन सभी को पूछना चाहिए जो मेरी तरह सजग और सक्रिय हैं अपने रचनाधर्म को लेकर। वरना लोग आगे से हो कर इस बात को कहां समझेंगे कि-
“मैं पर्वतों से लड़ता रहा और चंद लोग।
गीली ज़मीन खोद के फ़रहाद हो गए।।”
शेर मेरा नहीं साहब! किसी उस्ताद का है। यहां फिट हो रहा था, तो करना पड़ा।
【प्रणय प्रभात】

1 Like · 236 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
कहमुकरी
कहमुकरी
डॉ.सीमा अग्रवाल
**मन में चली  हैँ शीत हवाएँ**
**मन में चली हैँ शीत हवाएँ**
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
*अलविदा तेईस*
*अलविदा तेईस*
Shashi kala vyas
"कभी"
Dr. Kishan tandon kranti
सरहद पर गिरवीं है
सरहद पर गिरवीं है
Satish Srijan
बड़ी अजब है जिंदगी,
बड़ी अजब है जिंदगी,
sushil sarna
नज़्म तुम बिन कोई कही ही नहीं।
नज़्म तुम बिन कोई कही ही नहीं।
Neelam Sharma
" वो क़ैद के ज़माने "
Chunnu Lal Gupta
मंजिल
मंजिल
Swami Ganganiya
लक्ष्य
लक्ष्य
Sanjay ' शून्य'
खोल नैन द्वार माँ।
खोल नैन द्वार माँ।
लक्ष्मी सिंह
*कामदेव को जीता तुमने, शंकर तुम्हें प्रणाम है (भक्ति-गीत)*
*कामदेव को जीता तुमने, शंकर तुम्हें प्रणाम है (भक्ति-गीत)*
Ravi Prakash
3182.*पूर्णिका*
3182.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
- जन्म लिया इस धरती पर तो कुछ नेक काम कर जाओ -
- जन्म लिया इस धरती पर तो कुछ नेक काम कर जाओ -
bharat gehlot
* आस्था *
* आस्था *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
सम्मान में किसी के झुकना अपमान नही होता
सम्मान में किसी के झुकना अपमान नही होता
Kumar lalit
कुछ बातें ज़रूरी हैं
कुछ बातें ज़रूरी हैं
Mamta Singh Devaa
दास्तान-ए- वेलेंटाइन
दास्तान-ए- वेलेंटाइन
Dr. Mahesh Kumawat
झील किनारे
झील किनारे
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
कवि
कवि
Pt. Brajesh Kumar Nayak
चलो माना तुम्हें कष्ट है, वो मस्त है ।
चलो माना तुम्हें कष्ट है, वो मस्त है ।
Dr. Man Mohan Krishna
अजीब मानसिक दौर है
अजीब मानसिक दौर है
पूर्वार्थ
विषय -घर
विषय -घर
rekha mohan
कभी सुलगता है, कभी उलझता  है
कभी सुलगता है, कभी उलझता है
Anil Mishra Prahari
गांव अच्छे हैं।
गांव अच्छे हैं।
Amrit Lal
■ एक होते हैं पराधीन और एक होते हैं स्वाधीन। एक को सांस तक ब
■ एक होते हैं पराधीन और एक होते हैं स्वाधीन। एक को सांस तक ब
*Author प्रणय प्रभात*
रूबरू मिलने का मौका मिलता नही रोज ,
रूबरू मिलने का मौका मिलता नही रोज ,
Anuj kumar
तारे हैं आसमां में हजारों हजार दोस्त।
तारे हैं आसमां में हजारों हजार दोस्त।
सत्य कुमार प्रेमी
खिला हूं आजतक मौसम के थपेड़े सहकर।
खिला हूं आजतक मौसम के थपेड़े सहकर।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
एहसास के रिश्तों में
एहसास के रिश्तों में
Dr fauzia Naseem shad
Loading...