Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 Aug 2023 · 1 min read

■ असलियत

■ असलियत

Language: Hindi
2 Likes · 182 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*तपती धूप सता रही, माँ बच्चे के साथ (कुंडलिया)*
*तपती धूप सता रही, माँ बच्चे के साथ (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
जीवन के बुझे हुए चिराग़...!!!
जीवन के बुझे हुए चिराग़...!!!
Jyoti Khari
छान रहा ब्रह्मांड की,
छान रहा ब्रह्मांड की,
sushil sarna
!! जानें कितने !!
!! जानें कितने !!
Chunnu Lal Gupta
चुभते शूल.......
चुभते शूल.......
Kavita Chouhan
2533.पूर्णिका
2533.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
हिंदी दोहा -रथ
हिंदी दोहा -रथ
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
प्रणय 9
प्रणय 9
Ankita Patel
*लम्हा  प्यारा सा पल में  गुजर जाएगा*
*लम्हा प्यारा सा पल में गुजर जाएगा*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
सावन भादो
सावन भादो
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
पलक-पाँवड़े
पलक-पाँवड़े
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
काफी ढूंढ रही थी में खुशियों को,
काफी ढूंढ रही थी में खुशियों को,
Kanchan Alok Malu
किसी मोड़ पर अब रुकेंगे नहीं हम।
किसी मोड़ पर अब रुकेंगे नहीं हम।
surenderpal vaidya
■ नि:शुल्क सलाह।।😊
■ नि:शुल्क सलाह।।😊
*Author प्रणय प्रभात*
गुम है सरकारी बजट,
गुम है सरकारी बजट,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
खुद का साथ
खुद का साथ
Shakuntla Shaku
Bahut hui lukka chhipi ,
Bahut hui lukka chhipi ,
Sakshi Tripathi
अगर आप सही हैं, तो आपके साथ सही ही होगा।
अगर आप सही हैं, तो आपके साथ सही ही होगा।
Dr. Pradeep Kumar Sharma
संघर्ष ,संघर्ष, संघर्ष करना!
संघर्ष ,संघर्ष, संघर्ष करना!
Buddha Prakash
तोड देना वादा,पर कोई वादा तो कर
तोड देना वादा,पर कोई वादा तो कर
Ram Krishan Rastogi
*
*"ममता"* पार्ट-3
Radhakishan R. Mundhra
भारत के बदनामी
भारत के बदनामी
Shekhar Chandra Mitra
प्रकृति
प्रकृति
लक्ष्मी सिंह
रात के अंधेरे के निकलते ही मशहूर हो जाऊंगा मैं,
रात के अंधेरे के निकलते ही मशहूर हो जाऊंगा मैं,
कवि दीपक बवेजा
यूँ तो कही दफ़ा पहुँची तुम तक शिकायत मेरी
यूँ तो कही दफ़ा पहुँची तुम तक शिकायत मेरी
'अशांत' शेखर
अपने हुए पराए लाखों जीवन का यही खेल है
अपने हुए पराए लाखों जीवन का यही खेल है
प्रेमदास वसु सुरेखा
मेरी निजी जुबान है, हिन्दी ही दोस्तों
मेरी निजी जुबान है, हिन्दी ही दोस्तों
SHAMA PARVEEN
विटप बाँटते छाँव है,सूर्य बटोही धूप।
विटप बाँटते छाँव है,सूर्य बटोही धूप।
डॉक्टर रागिनी
लौ
लौ
Dr. Seema Varma
बहुत नफा हुआ उसके जाने से मेरा।
बहुत नफा हुआ उसके जाने से मेरा।
शिव प्रताप लोधी
Loading...