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27 Feb 2024 · 1 min read

ਐਵੇਂ ਆਸ ਲਗਾਈ ਬੈਠੇ ਹਾਂ

ਤੇਰਾ ਖ਼ਾਬ ਸਜਾਈ ਬੈਠੇ ਹਾਂ।
ਐਵੇਂ ਦਿਲ ਭਰਮਾਈ ਬੈਠੇ ਹਾਂ।
ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਕਦ ਮੁੜਦੇ ਨੇ
ਐਵੇਂ ਨੈਣ ਰੁਆਈ ਬੈਠੇ ਹਾਂ।

ਸ਼ਿਕਰੇ ਯਾਰ ਬਣਾ ਬੈਠੇ
ਦਿਲ ਬੇਕਦਰਾਂ ਨਾਲ ਲਾ ਬੈਠੇ।
ਮਾਸ ਦਿਲ ਦਾ ਚੂੰਡ ਲਿਆ ,
ਐਵੇਂ ਆਸ ਲਗਾਈ ਬੈਠੇ ਹਾਂ।

ਖ਼ਾਬ ਅੱਖਾਂ ਵਿਚ ਆ ਵਸਦੇ ਨੇ
ਰਾਹ ਮੰਜ਼ਿਲਾਂ ਕਦ ਦੱਸਦੇ ਨੇ।
ਉਡਦੀ ਧੂੜ ਦੇ ਪਰਛਾਵੇਂ ਤੱਕ
ਜੀਅ ਤਰਸਾਈਂ ਬੈਠੇ ਹਾਂ।

ਸੁਰਿੰਦਰ ਕੋਰ

Language: Punjabi
44 Views
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