Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
10 Nov 2023 · 1 min read

।। धन तेरस ।।

।। धन तेरस ।।
———————
धन तेरस की रात जब आऐं
सम्पन्नता की बरसात ले आऐ
अवसादों के हर चेहरे पर
खुशियों की सौगात ले आऐं

205 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
दीप प्रज्ज्वलित करते, वे  शुभ दिन है आज।
दीप प्रज्ज्वलित करते, वे शुभ दिन है आज।
Anil chobisa
मची हुई संसार में,न्यू ईयर की धूम
मची हुई संसार में,न्यू ईयर की धूम
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
मैं तुम्हें यूँ ही
मैं तुम्हें यूँ ही
हिमांशु Kulshrestha
"होली है आई रे"
Rahul Singh
मेरा जीवन बसर नहीं होता।
मेरा जीवन बसर नहीं होता।
सत्य कुमार प्रेमी
ये मतलबी दुनिया है साहब,
ये मतलबी दुनिया है साहब,
Umender kumar
नववर्ष का आगाज़
नववर्ष का आगाज़
Vandna Thakur
सफर 👣जिंदगी का
सफर 👣जिंदगी का
डॉ० रोहित कौशिक
It’s all a process. Nothing is built or grown in a day.
It’s all a process. Nothing is built or grown in a day.
पूर्वार्थ
वक़्त की एक हद
वक़्त की एक हद
Dr fauzia Naseem shad
■ अपना दर्द, दवा भी अपनी।।
■ अपना दर्द, दवा भी अपनी।।
*Author प्रणय प्रभात*
आखिरी ख्वाहिश
आखिरी ख्वाहिश
Surinder blackpen
ये पीढ कैसी ;
ये पीढ कैसी ;
Dr.Pratibha Prakash
ग़ज़ल/नज़्म: एक तेरे ख़्वाब में ही तो हमने हजारों ख़्वाब पाले हैं
ग़ज़ल/नज़्म: एक तेरे ख़्वाब में ही तो हमने हजारों ख़्वाब पाले हैं
अनिल कुमार
जंग तो दिमाग से जीती जा सकती है......
जंग तो दिमाग से जीती जा सकती है......
shabina. Naaz
स्पर्श
स्पर्श
Ajay Mishra
तुम्हें पाना-खोना एकसार सा है--
तुम्हें पाना-खोना एकसार सा है--
Shreedhar
बीजारोपण
बीजारोपण
आर एस आघात
*छाया कैसा  नशा है कैसा ये जादू*
*छाया कैसा नशा है कैसा ये जादू*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
#वर_दक्षिण (दहेज)
#वर_दक्षिण (दहेज)
संजीव शुक्ल 'सचिन'
मन मेरे तू सावन सा बन....
मन मेरे तू सावन सा बन....
डॉ.सीमा अग्रवाल
तारों का झूमर
तारों का झूमर
Dr. Seema Varma
पेटी वाला बर्फ( बाल कविता)
पेटी वाला बर्फ( बाल कविता)
Ravi Prakash
तुझसे कुछ नहीं चाहिये ए जिन्दगीं
तुझसे कुछ नहीं चाहिये ए जिन्दगीं
Jay Dewangan
सम्मान तुम्हारा बढ़ जाता श्री राम चरण में झुक जाते।
सम्मान तुम्हारा बढ़ जाता श्री राम चरण में झुक जाते।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
हम वो फूल नहीं जो खिले और मुरझा जाएं।
हम वो फूल नहीं जो खिले और मुरझा जाएं।
Phool gufran
शिकवा
शिकवा
अखिलेश 'अखिल'
कविता
कविता
Shiva Awasthi
भ्रष्ट होने का कोई तय अथवा आब्जेक्टिव पैमाना नहीं है। एक नास
भ्रष्ट होने का कोई तय अथवा आब्जेक्टिव पैमाना नहीं है। एक नास
Dr MusafiR BaithA
समसामायिक दोहे
समसामायिक दोहे
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
Loading...