Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
13 Jun 2016 · 1 min read

ग़ज़ल

दर्द को अब मुँह चिढ़ाना आ गया,
आसुंओं में मुस्कुराना आ गया।

फ़र्ज़ पर देकर बयाना मौत को,
क़र्ज़ साँसों का चुकाना आ गया।

हाय कातिल वो निगाहों की छुरी,
सिम्त दिल के अब निशाना आ गया।

चाशनी में घोलकर गुफ़्तार को,
काम उनको भी बनाना आ गया।

आहटें दिल पर नए तूफ़ान की,
लग रहा वापिस दिवाना आ गया।

ख्वाब के पंछी चलो आओ इधर,
दिल लिए अश्क़ों का दाना आ गया।

दिल को तेरी याद के शामो सहर,
रेशमी पर्दे हिलाना आ गया।

भूख से बिलखेंगे बच्चे अब नहीं,
बेच ईमां धन कमाना आ गया।

बोझ बनने जब लगी फरमाइशें,
याद बाबूजी का शाना आ गया।

ज़ीस्त का हासिल ‘शिखा’ इतना ही बस,
दर्द ओढ़े गम बिछाना आ गया।

दीपशिखा सागर-

1 Like · 174 Views
You may also like:
■ दैनिक लेखन स्पर्द्धा के अन्तर्गय
*प्रणय प्रभात*
मौसम
Surya Barman
आया सावन - पावन सुहवान
Rj Anand Prajapati
Oh dear... don't fear.
Taj Mohammad
हिंदी माता की आराधना
ओनिका सेतिया 'अनु '
ट्रस्टीशिप विचार: 1982 में प्रकाशित मेरी पुस्तक
Ravi Prakash
उसने कहा था
अंजनीत निज्जर
बख्स मुझको रहमत वो अंदाज़ मिल जाए
VINOD KUMAR CHAUHAN
गुम होता अस्तित्व भाभी, दामाद, जीजा जी, पुत्र वधू का
Dr Meenu Poonia
थक चुकी ये ज़िन्दगी
Shivkumar Bilagrami
आज आंखों में
Dr fauzia Naseem shad
राम केवल एक चुनावी मुद्दा नही हमारे आराध्य है
पंकज कुमार शर्मा 'प्रखर'
I feel h
Swami Ganganiya
कवि के उर में जब भाव भरे
लक्ष्मी सिंह
स्वास्थ्य
Saraswati Bajpai
“फैकबुक फ्रेंड”
DrLakshman Jha Parimal
अधूरी बातें
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
गणेश चतुर्थी
Ram Krishan Rastogi
परिवार
सूर्यकांत द्विवेदी
लहजा
सिद्धार्थ गोरखपुरी
हमारे बाबू जी (पिता जी)
Ramesh Adheer
डूब जाऊंगा मस्ती में, जरा सी शाम होने दो। मैं...
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
जिंदगी देखा तुझे है आते अरु जाते हुए।
सत्य कुमार प्रेमी
✍️आओ हम सोचे✍️
'अशांत' शेखर
अमृत महोत्सव मनायेंगे
नूरफातिमा खातून नूरी
मैं समझता हूँ तुमको अपना
gurudeenverma198
बुआ आई
राजेश 'ललित'
बहुत अच्छे लगते ( गीतिका )
Dr. Sunita Singh
बेटी की विदाई
प्रीतम श्रावस्तवी
माँ ब्रह्मचारिणी
Vandana Namdev
Loading...