Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
21 Sep 2022 · 1 min read

ग़ज़ल /

मुझे आज तुझसे पड़ा काम साकी ।
तेरे हाथ में है मेरा ज़ाम साकी ।

न यारों , न महबूब और न किसी के,
तेरे नाम होगी मेरी शाम साकी ।

मै बदनाम होके बनूँ नामवर – सा,
अगर लेगा तू जो , मेरा नाम साकी ।

तू चाहे तो थोड़ी सी इज़्ज़त मिलेगी,
वगरना हूँ अब तक मैं बदनाम साकी ।

चढ़ा जो नशा , फिर उतरता नहीं है,
ये मस्तों की मस्ती का पैगाम साकी ।

कि अल्लाह,’ईश्वर’,पयम्बर कि ख़ुद में,
वो रहता इन्हीं में है गुमनाम साकी ।

—- ईश्वर दयाल गोस्वामी ।

Language: Hindi
Tag: ग़ज़ल
11 Likes · 20 Comments · 173 Views
You may also like:
“माटी ” तेरे रूप अनेक
DESH RAJ
आख़िरी मुलाक़ात ghazal by Vinit Singh Shayar
Vinit kumar
Rainbow (indradhanush)
Nupur Pathak
क्यों भावनाएं भड़काते हो?
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
ए'तिराफ़-ए-'अहद-ए-वफ़ा
Shyam Sundar Subramanian
गर्दिशों की जिन्दगी है।
Taj Mohammad
रबीन्द्रनाथ टैगोर पर तीन मुक्तक
Anamika Singh
=*तुम अन्न-दाता हो*=
Prabhudayal Raniwal
राष्ट्रमंडल खेल- 2022
Deepak Kohli
कवि कर्म
दशरथ रांकावत 'शक्ति'
“मोह मोह”…….”ॐॐ”….
Piyush Goel
धार छंद "आज की दशा"
बासुदेव अग्रवाल 'नमन'
*साठ वर्ष : सात दोहे*
Ravi Prakash
अजीज
shabina. Naaz
मैं समंदर के उस पार था
Dalveer Singh
इंक़लाबी शायर
Shekhar Chandra Mitra
मां की महिमा
Shivraj Anand
राम नाम ही बोलिये, महावीरा
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
गलतफहमी
विजय कुमार अग्रवाल
तुम्हें डर कैसा .....
लक्ष्मण 'बिजनौरी'
कुरुक्षेत्र
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
क्युं नहीं
Seema 'Tu hai na'
पापा की परी...
Sapna K S
नारी सशक्तिकरण
अभिनव अदम्य
जन्मदिवस का महत्व...
पंकज कुमार शर्मा 'प्रखर'
देर
पीयूष धामी
'बाबूजी' एक पिता
पंकज कुमार कर्ण
जैसी लफ़्ज़ों में बे'क़रारी है
Dr fauzia Naseem shad
✍️ज़ख्मो का स्वाद✍️
'अशांत' शेखर
मेरी गुड़िया (संस्मरण)
Kanchan Khanna
Loading...