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21 Sep 2016 · 1 min read

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“हुई दस्तक दरारों से,निकलकर इंतजार आया,
खुली है खिड़कियाँ देखो,किसी अपने का तार आया।”
———————
“लिफाफा बंद जैसी बेपता सी जिन्दगी ये थी,
वो कुछ लफ्जों में भर मुस्कान,ले खुशियां हज़ार आया।

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
207 Views
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