Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 May 2023 · 2 min read

हार्पिक से धुला हुआ कंबोड

नेता
नेता वह है
जो किसी देश या संगठन का
भली-भाँती नेतृत्व करे
साथ ही देश और लोगो को
एकता के सूत्र में बांधे
सज्जन को सम्मान दे
दुष्टों को साधे
पर आज ऐसा नहीं है—
कक्षा का नालायक छात्र
जब सड़क पर आता है
अकड़ कर चलता
रंगबाज़ी दिखाता है
और जूते-लात खाते-खिलाते
हो जाता है मशहूर
दुनिया के लिए बिगड़ैल
खुद के लिए शूर
और जब किसी शूर की दुष्टता
दुनिया जान लेती है
तो उसके सामने
खुद को हारा हुआ मान लेती है
इस प्रकार मानवता रोती है
वह जहाँ खड़ा होता है
कतार वहीं से प्रारंभ होती है।
अपने इस रूतबे में
निकाय चुनावों में सीट हँथियाता है
राजनीति शास्त्र का छात्र हो जाता है
और किसी भी राजनीतिक गिरोह की
सदस्यता ग्रहण करने का पात्र हो जाता है
एक दल संरक्षक बनता है
दूसरे शोर मचाते हैं
उसके काले कारनामे
खबरों में आते हैं
और इस प्रकार जब पोल खुलती है
उस पर संविधान की धाराओं का
अच्छा खासा लोड हो जाता है
फिर वह मदर पार्टी छोड़कर
बेशर्मी से मुँह मोड़कर
जब सत्ता दल से जुड़ता है
हार्पिक से धुला हुआ
कम्बोड हो जाता है
चुनाव आते हैं
हाथ जोड़ता है
वादे करता है
कभी-कभी तो
दलित का जूठन भी
मुँह में डाल लेता है
और इस प्रकार झाँसा देकर
अपनी गाड़ी निकाल लेता है
जीत कर आता है
घूस और कमीशन के शिवा
कुछ नहीं खाता है
जनता के द्वारा चुना हुआ यह नुमाइंदा
जब जनता को ही चूना लगाता है
देश पछताता है
उसका बस एक सूत्रीय कार्यक्रम होता है
अपना स्वार्थ साधना
जिसके लिए वह
युवाओं की टीम तैयार करता है
चमचों के झुंड में रहता है
उन्हीं के माध्यम से काम होते हैं
उन्हीं के माध्यम से कमीशन खाता है
तगड़ा हो जाता है
बस यही आज के नेताओं की चाल है
यही कारण है कि मेरा देश बदहाल है।

2 Likes · 290 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
View all
You may also like:
प्रेम अपाहिज ठगा ठगा सा, कली भरोसे की कुम्हलाईं।
प्रेम अपाहिज ठगा ठगा सा, कली भरोसे की कुम्हलाईं।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
*संस्मरण*
*संस्मरण*
Ravi Prakash
*मेरे दिल में आ जाना*
*मेरे दिल में आ जाना*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
मधुर व्यवहार
मधुर व्यवहार
Paras Nath Jha
Lambi khamoshiyo ke bad ,
Lambi khamoshiyo ke bad ,
Sakshi Tripathi
फितरत इंसान की....
फितरत इंसान की....
Tarun Singh Pawar
23/94.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/94.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
माँ दुर्गा मुझे अपना सहारा दो
माँ दुर्गा मुझे अपना सहारा दो
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
थी हवा ख़ुश्क पर नहीं सूखे - संदीप ठाकुर
थी हवा ख़ुश्क पर नहीं सूखे - संदीप ठाकुर
Sandeep Thakur
दरख़्त और व्यक्तित्व
दरख़्त और व्यक्तित्व
Dr Parveen Thakur
जनता हर पल बेचैन
जनता हर पल बेचैन
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
दस्त बदरिया (हास्य-विनोद)
दस्त बदरिया (हास्य-विनोद)
गुमनाम 'बाबा'
दशहरा पर्व पर कुछ दोहे :
दशहरा पर्व पर कुछ दोहे :
sushil sarna
"New year की बधाई "
Yogendra Chaturwedi
मेरे शब्द, मेरी कविता, मेरे गजल, मेरी ज़िन्दगी का अभिमान हो तुम।
मेरे शब्द, मेरी कविता, मेरे गजल, मेरी ज़िन्दगी का अभिमान हो तुम।
Anand Kumar
जिस दिन कविता से लोगों के,
जिस दिन कविता से लोगों के,
जगदीश शर्मा सहज
घट भर पानी राखिये पंक्षी प्यास बुझाय |
घट भर पानी राखिये पंक्षी प्यास बुझाय |
Gaurav Pathak
ये जो मेरी आँखों में
ये जो मेरी आँखों में
हिमांशु Kulshrestha
" मैं फिर उन गलियों से गुजरने चली हूँ "
Aarti sirsat
नूतन वर्ष
नूतन वर्ष
Madhavi Srivastava
मासूमियत
मासूमियत
Punam Pande
ख़ून इंसानियत का
ख़ून इंसानियत का
Dr fauzia Naseem shad
तेरा - मेरा
तेरा - मेरा
Ramswaroop Dinkar
जीवन में ठहरे हर पतझड़ का बस अंत हो
जीवन में ठहरे हर पतझड़ का बस अंत हो
Dr Tabassum Jahan
*खामोशी अब लब्ज़ चाहती है*
*खामोशी अब लब्ज़ चाहती है*
Shashi kala vyas
संवेदनाएं जिंदा रखो
संवेदनाएं जिंदा रखो
नेताम आर सी
दरकती है उम्मीदें
दरकती है उम्मीदें
Surinder blackpen
ईश्वर से बात
ईश्वर से बात
Rakesh Bahanwal
#शेर
#शेर
*Author प्रणय प्रभात*
खुद के प्रति प्रतिबद्धता
खुद के प्रति प्रतिबद्धता
लक्ष्मी सिंह
Loading...