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25 Sep 2016 · 1 min read

हसरतें घायल और दायित्व मजबूत हो रहें है

हसरते घायल और दायित्व मजबूत हो रहे
आस्तित्व की खोज मे खुद से गुम हो रहेहै…
प्रौढता की चादर ओढे हसरत मुसकुरा रही है
भीगी पलकों से शबनम गिरा रही है
दायित्वो का बोझ लिए हर पल सिसक रही है
हसरत हमारी तिल तिल सिमट रही है ….
हसरत कहती एक पल मुस्कुरा ले
जी ले अपनी जिंदगी कुछ तो खुशी मना ले
दायित्व कहता जिम्मेदारियॉ निभा ले
आएगा वक्त खुशी का पहले दायित्व निभा ले
नीरा रानी

Language: Hindi
388 Views
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