Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
31 Mar 2024 · 1 min read

हर मौसम का अपना अलग तजुर्बा है

हर मौसम का अपना अलग तजुर्बा है
वही तपा है जो हर मौसम से गुजरा है

कोई तरासता है खुद को मूरत की तरहा
किसी के लिए जिंदगी एक मुजरा है.||

✍️𝐊𝐚𝐯𝐢 𝐝𝐞𝐞𝐩𝐚𝐤 𝐬𝐚𝐫𝐚𝐥 ☑️

36 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
खालीपन – क्या करूँ ?
खालीपन – क्या करूँ ?
DR ARUN KUMAR SHASTRI
मन से भी तेज ( 3 of 25)
मन से भी तेज ( 3 of 25)
Kshma Urmila
"तब तुम क्या करती"
Lohit Tamta
निराशा क्यों?
निराशा क्यों?
Sanjay ' शून्य'
समय
समय
Dr.Priya Soni Khare
माँ नहीं मेरी
माँ नहीं मेरी
Dr fauzia Naseem shad
मिलना हम मिलने आएंगे होली में।
मिलना हम मिलने आएंगे होली में।
सत्य कुमार प्रेमी
किताबों में झुके सिर दुनिया में हमेशा ऊठे रहते हैं l
किताबों में झुके सिर दुनिया में हमेशा ऊठे रहते हैं l
Ranjeet kumar patre
हमें सूरज की तरह चमकना है, सब लोगों के दिलों में रहना है,
हमें सूरज की तरह चमकना है, सब लोगों के दिलों में रहना है,
DrLakshman Jha Parimal
आदिशक्ति वन्दन
आदिशक्ति वन्दन
Mohan Pandey
मैंने खुद को जाना, सुना, समझा बहुत है
मैंने खुद को जाना, सुना, समझा बहुत है
सिद्धार्थ गोरखपुरी
मित्रो जबतक बातें होंगी, जनमन में अभिमान की
मित्रो जबतक बातें होंगी, जनमन में अभिमान की
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
मन्दिर में है प्राण प्रतिष्ठा , न्यौता सबका आने को...
मन्दिर में है प्राण प्रतिष्ठा , न्यौता सबका आने को...
Shubham Pandey (S P)
"फर्क बहुत गहरा"
Dr. Kishan tandon kranti
छिप-छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ बहाने वालों
छिप-छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ बहाने वालों
पूर्वार्थ
मासुमियत - बेटी हूँ मैं।
मासुमियत - बेटी हूँ मैं।
ऐ./सी.राकेश देवडे़ बिरसावादी
"अश्क भरे नयना"
Ekta chitrangini
जरूरी है
जरूरी है
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
*नया साल*
*नया साल*
Dushyant Kumar
हर पल ये जिंदगी भी कोई खास नहीं होती ।
हर पल ये जिंदगी भी कोई खास नहीं होती ।
Phool gufran
दिल से करो पुकार
दिल से करो पुकार
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
मैं कौन हूं
मैं कौन हूं
प्रेमदास वसु सुरेखा
मेरा गांव
मेरा गांव
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
अब कुछ बचा नहीं बिकने को बाजार में
अब कुछ बचा नहीं बिकने को बाजार में
Ashish shukla
नव वर्ष हमारे आए हैं
नव वर्ष हमारे आए हैं
Er.Navaneet R Shandily
कविता-मरते किसान नहीं, मर रही हमारी आत्मा है।
कविता-मरते किसान नहीं, मर रही हमारी आत्मा है।
Shyam Pandey
विशेष दिन (महिला दिवस पर)
विशेष दिन (महिला दिवस पर)
Kanchan Khanna
"राज़" ग़ज़ल
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
*हर मरीज के भीतर समझो, बसे हुए भगवान हैं (गीत)*
*हर मरीज के भीतर समझो, बसे हुए भगवान हैं (गीत)*
Ravi Prakash
■ भय का कारोबार...
■ भय का कारोबार...
*Author प्रणय प्रभात*
Loading...