Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
10 Jan 2024 · 1 min read

*हर मरीज के भीतर समझो, बसे हुए भगवान हैं (गीत)*

हर मरीज के भीतर समझो, बसे हुए भगवान हैं (गीत)
_________________________
हर मरीज के भीतर समझो, बसे हुए भगवान हैं
1)
आते हैं भगवान रूप धर, सौ-सौ रोगों वाला
दुखी वेदना से कराहते, लिए आस का प्याला
जिनकी ऑंखों में है करुणा, वही सिर्फ इंसान हैं
2)
सारे साधन ज्ञान समय दे, रोगी का उपचार हो
अनुचित लोभ नहीं जीवन में, किंचित भी आधार हो
नवजीवन मुस्कान प्रदाता, अस्पताल अभियान हैं
हर मरीज के भीतर समझो, बसे हुए भगवान हैं
3)
जिनमें सेवा-भाव बसा है, शत-शत उन्हें प्रणाम हैं
नर में नारायण के दर्शन, पूजा के आयाम हैं
रचे प्रतिज्ञा के शुचि पावन, इस ही लिए विधान हैं
——————————-
रचयिता: रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 99976 15451

167 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Ravi Prakash
View all
You may also like:
साथ
साथ
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
स्त्री की स्वतंत्रता
स्त्री की स्वतंत्रता
Sunil Maheshwari
मैं लिखूंगा तुम्हें
मैं लिखूंगा तुम्हें
हिमांशु Kulshrestha
■ पहले आवेदन (याचना) करो। फिर जुगाड़ लगाओ और पाओ सम्मान छाप प
■ पहले आवेदन (याचना) करो। फिर जुगाड़ लगाओ और पाओ सम्मान छाप प
*प्रणय प्रभात*
क्षमा करें तुफैलजी! + रमेशराज
क्षमा करें तुफैलजी! + रमेशराज
कवि रमेशराज
सच का सौदा
सच का सौदा
अरशद रसूल बदायूंनी
मौहब्बत को ख़ाक समझकर ओढ़ने आयी है ।
मौहब्बत को ख़ाक समझकर ओढ़ने आयी है ।
Phool gufran
*दिल का दर्द*
*दिल का दर्द*
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
पास नहीं
पास नहीं
Pratibha Pandey
"ऐसा मंजर होगा"
पंकज कुमार कर्ण
कागज ए ज़िंदगी............एक सोच
कागज ए ज़िंदगी............एक सोच
Neeraj Agarwal
ଆପଣ କିଏ??
ଆପଣ କିଏ??
Otteri Selvakumar
सुख दुख
सुख दुख
Sûrëkhâ
वैश्विक जलवायु परिवर्तन और मानव जीवन पर इसका प्रभाव
वैश्विक जलवायु परिवर्तन और मानव जीवन पर इसका प्रभाव
Shyam Sundar Subramanian
दूसरा मौका
दूसरा मौका
हिमांशु बडोनी (दयानिधि)
"गुलशन"
Dr. Kishan tandon kranti
गुरु मांत है गुरु पिता है गुरु गुरु सर्वे गुरु
गुरु मांत है गुरु पिता है गुरु गुरु सर्वे गुरु
प्रेमदास वसु सुरेखा
खाया रसगुल्ला बड़ा , एक जलेबा गर्म (हास्य कुंडलिया)
खाया रसगुल्ला बड़ा , एक जलेबा गर्म (हास्य कुंडलिया)
Ravi Prakash
वज़ह सिर्फ तूम
वज़ह सिर्फ तूम
krishna waghmare , कवि,लेखक,पेंटर
चुका न पाएगा कभी,
चुका न पाएगा कभी,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
राज जिन बातों में था उनका राज ही रहने दिया
राज जिन बातों में था उनका राज ही रहने दिया
कवि दीपक बवेजा
सबका भला कहां करती हैं ये बारिशें
सबका भला कहां करती हैं ये बारिशें
Abhinay Krishna Prajapati-.-(kavyash)
*हम पर अत्याचार क्यों?*
*हम पर अत्याचार क्यों?*
Dushyant Kumar
-- दिखावटी लोग --
-- दिखावटी लोग --
गायक - लेखक अजीत कुमार तलवार
नीली बदरिया में चांद निकलता है,
नीली बदरिया में चांद निकलता है,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
कब जुड़ता है टूट कर,
कब जुड़ता है टूट कर,
sushil sarna
ज़िंदगी ऐसी कि हर सांस में
ज़िंदगी ऐसी कि हर सांस में
Dr fauzia Naseem shad
रिशते ना खास होते हैं
रिशते ना खास होते हैं
Dhriti Mishra
हो गये अब हम तुम्हारे जैसे ही
हो गये अब हम तुम्हारे जैसे ही
gurudeenverma198
हंसगति
हंसगति
डॉ.सीमा अग्रवाल
Loading...