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27 Sep 2022 · 1 min read

हम भूल गए सच में, संस्कृति को

हम भूल गए सच में, अपनी संस्कृति- संस्कार।
इसीलिए तो बन गए, वृद्धाश्रम यहाँ हजार।।
हम भूल गए सच में——————-।।

जिसने हमको दिया जन्म, उस माँ की पीड़ा भूल गए।
पालन -पोषण जिसने किया, उस बाप का दर्द भूल गए।।
बुढ़ापे में उनको बेघर कर, किया है उनपे अत्याचार।
हम भूल गए सच में———————-।।

सहे होंगे कितने कष्ट उन्होंने, हमको धनवान बनाने में।
लिया होगा किसी से कर्ज , हमारा यह ताज सजाने में।।
लेकिन हम नहीं कर सके, बुढ़ापे में उनके सपनें साकार।
हम भूल गए सच में —————————–।।

अपने बच्चे भी सीख रहे हैं, हमसे ही ऐसे गुण और धर्म।
यही होगा हाल हमारा भी , होंगे दोषी ये अपने ही कर्म।।
ठुकरा देंगे हमको बुढ़ापे में, हमको समझकर ऐसे बेकार।
हम भूल गए सच में —————————–।।

शिक्षक एवं साहित्यकार-
गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां(राजस्थान)
मोबाईल नम्बर- 9571070847

Language: Hindi
Tag: गीत
159 Views
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