Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 Apr 2024 · 1 min read

हम कितने नोट/ करेंसी छाप सकते है

हम कितने नोट/ करेंसी छाप सकते है
जितना कि वर्तमान मे भारतीय खजाने मे सोना है
और हमारे पास सोने की कीमत लगभग 5 लाख करोड़ की है
जो वर्तमान सरकार ने कितना नोट / करेंसी जारी कर रखी है
लगभग 34 लाख करोड़ जिसमे 29 लाख करोड़ नकली मानें जायेंगे हम भारतीय खजाने के अनुसार चले तो

48 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
2888.*पूर्णिका*
2888.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
-मंहगे हुए टमाटर जी
-मंहगे हुए टमाटर जी
Seema gupta,Alwar
Now we have to introspect how expensive it was to change the
Now we have to introspect how expensive it was to change the
DrLakshman Jha Parimal
सलीका शब्दों में नहीं
सलीका शब्दों में नहीं
उमेश बैरवा
"आत्मकथा"
Rajesh vyas
ग़ज़ल (ज़िंदगी)
ग़ज़ल (ज़िंदगी)
डॉक्टर रागिनी
समझ आती नहीं है
समझ आती नहीं है
हिमांशु Kulshrestha
मोर मुकुट संग होली
मोर मुकुट संग होली
Dinesh Kumar Gangwar
सौन्दर्य के मक़बूल, इश्क़! तुम क्या जानो प्रिय ?
सौन्दर्य के मक़बूल, इश्क़! तुम क्या जानो प्रिय ?
Varun Singh Gautam
मेरे अल्फ़ाज़
मेरे अल्फ़ाज़
Dr fauzia Naseem shad
बस इतनी सी बात समंदर को खल गई
बस इतनी सी बात समंदर को खल गई
Prof Neelam Sangwan
न जाने कौन रह गया भीगने से शहर में,
न जाने कौन रह गया भीगने से शहर में,
शेखर सिंह
धर्मांध
धर्मांध
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
*तू बन जाए गर हमसफऱ*
*तू बन जाए गर हमसफऱ*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
वासियत जली थी
वासियत जली थी
भरत कुमार सोलंकी
कर्म कभी माफ नहीं करता
कर्म कभी माफ नहीं करता
नूरफातिमा खातून नूरी
बिटिया की जन्मकथा / मुसाफ़िर बैठा
बिटिया की जन्मकथा / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
मज़दूर
मज़दूर
Neelam Sharma
हर बार धोखे से धोखे के लिये हम तैयार है
हर बार धोखे से धोखे के लिये हम तैयार है
manisha
भरे हृदय में पीर
भरे हृदय में पीर
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
Dr. Arun Kumar shastri
Dr. Arun Kumar shastri
DR ARUN KUMAR SHASTRI
है पत्रकारिता दिवस,
है पत्रकारिता दिवस,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
आधुनिक भारत के कारीगर
आधुनिक भारत के कारीगर
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
आगे निकल जाना
आगे निकल जाना
surenderpal vaidya
परहेज बहुत करते है दौलतमंदो से मिलने में हम
परहेज बहुत करते है दौलतमंदो से मिलने में हम
शिव प्रताप लोधी
मुक्तक
मुक्तक
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
श्री गणेश वंदना:
श्री गणेश वंदना:
जगदीश शर्मा सहज
एक जिद मन में पाल रखी है,कि अपना नाम बनाना है
एक जिद मन में पाल रखी है,कि अपना नाम बनाना है
पूर्वार्थ
#लघुकथा
#लघुकथा
*प्रणय प्रभात*
*स्वतंत्रता संग्राम के तपस्वी श्री सतीश चंद्र गुप्त एडवोकेट*
*स्वतंत्रता संग्राम के तपस्वी श्री सतीश चंद्र गुप्त एडवोकेट*
Ravi Prakash
Loading...