Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
1 Nov 2023 · 1 min read

~ हमारे रक्षक~

~ हमारे रक्षक~
हम बेफिक्रे हुए सोते हैं,
अपने घरों मकानों में।
सैनिक गोली झेल रहे हैं,
बर्फीली चट्टानों में।।
प्यार मोहब्बत के किस्सों में,
जब हम खोए रहते हैं।
रक्त बहाकर भी वो अपना
फर्ज निभाते रहते हैं।।
@करन केसरा भारत मां के उन वीरों की,
आंखों में एक सपना है।
हिंदू हो या मुस्लिम हो,
हर भारतवासी अपना है।।
दोनों ही के खातिर वो,
दुश्मन से टकरा जाते हैं।
भारत मां की गोदी में,
सीना ताने सो जाते हैं।।

3 Likes · 177 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
षड्यंत्रों वाली मंशा पर वार हुआ है पहली बार।
षड्यंत्रों वाली मंशा पर वार हुआ है पहली बार।
*प्रणय प्रभात*
गम खास होते हैं
गम खास होते हैं
ruby kumari
।।आध्यात्मिक प्रेम।।
।।आध्यात्मिक प्रेम।।
Aryan Raj
ज़िन्दगी
ज़िन्दगी
डॉक्टर रागिनी
ऐंचकताने    ऐंचकताने
ऐंचकताने ऐंचकताने
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
हादसों का बस
हादसों का बस
Dr fauzia Naseem shad
मन का समंदर
मन का समंदर
Sûrëkhâ
मैं जब भी लड़ नहीं पाई हूँ इस दुनिया के तोहमत से
मैं जब भी लड़ नहीं पाई हूँ इस दुनिया के तोहमत से
Shweta Soni
हमें रामायण
हमें रामायण
Dr.Rashmi Mishra
तुमने की दग़ा - इत्तिहाम  हमारे नाम कर दिया
तुमने की दग़ा - इत्तिहाम  हमारे नाम कर दिया
Atul "Krishn"
रमेशराज की पिता विषयक मुक्तछंद कविताएँ
रमेशराज की पिता विषयक मुक्तछंद कविताएँ
कवि रमेशराज
व्यवहारिकता का दौर
व्यवहारिकता का दौर
पूर्वार्थ
गंणतंत्रदिवस
गंणतंत्रदिवस
Bodhisatva kastooriya
हम रात भर यूहीं तड़पते रहे
हम रात भर यूहीं तड़पते रहे
Ram Krishan Rastogi
जलती बाती प्रेम की,
जलती बाती प्रेम की,
sushil sarna
पर्व है ऐश्वर्य के प्रिय गान का।
पर्व है ऐश्वर्य के प्रिय गान का।
surenderpal vaidya
मेरे पांच रोला छंद
मेरे पांच रोला छंद
Sushila joshi
कुछ खामोशियाँ तुम ले आना।
कुछ खामोशियाँ तुम ले आना।
Manisha Manjari
 मैं गोलोक का वासी कृष्ण
 मैं गोलोक का वासी कृष्ण
Pooja Singh
लड़कियां शिक्षा के मामले में लडको से आगे निकल रही है क्योंकि
लड़कियां शिक्षा के मामले में लडको से आगे निकल रही है क्योंकि
Rj Anand Prajapati
2603.पूर्णिका
2603.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
बसंत
बसंत
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
हाय री गरीबी कैसी मेरा घर  टूटा है
हाय री गरीबी कैसी मेरा घर टूटा है
कृष्णकांत गुर्जर
हिंदी सबसे प्यारा है
हिंदी सबसे प्यारा है
शेख रहमत अली "बस्तवी"
"साधक के गुण"
Yogendra Chaturwedi
हर कदम प्यासा रहा...,
हर कदम प्यासा रहा...,
Priya princess panwar
ये दुनिया बाजार है
ये दुनिया बाजार है
नेताम आर सी
प्रेमचंद के उपन्यासों में दलित विमर्श / MUSAFIR BAITHA
प्रेमचंद के उपन्यासों में दलित विमर्श / MUSAFIR BAITHA
Dr MusafiR BaithA
"Let us harness the power of unity, innovation, and compassi
Rahul Singh
*सहकारी युग (हिंदी साप्ताहिक), रामपुर, उत्तर प्रदेश का प्रथम
*सहकारी युग (हिंदी साप्ताहिक), रामपुर, उत्तर प्रदेश का प्रथम
Ravi Prakash
Loading...