Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
20 Feb 2023 · 1 min read

हमसे बात ना करो।

गमों ने जिन्दगी को जीना सिखा दिया है।
दर्दों ने इन लबों को हंसना सिखा दिया है।।

यूं जीने मरने की तुम हमसे बात ना करो।
हमने खुद ही कब्र का मकां बना लिया है।।

✍️✍️ ताज मोहम्मद ✍️✍️

234 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Taj Mohammad
View all
You may also like:
असली अभागा कौन ???
असली अभागा कौन ???
VINOD CHAUHAN
"सेहत का राज"
Dr. Kishan tandon kranti
मुझ को इतना बता दे,
मुझ को इतना बता दे,
Shutisha Rajput
वह लोग जिनके रास्ते कई होते हैं......
वह लोग जिनके रास्ते कई होते हैं......
कवि दीपक बवेजा
गिरगिट को भी अब मात
गिरगिट को भी अब मात
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
__________________
__________________
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
"चुनाव के दौरान नेता गरीबों के घर खाने ही क्यों जाते हैं, गर
गुमनाम 'बाबा'
एक अजीब कशिश तेरे रुखसार पर ।
एक अजीब कशिश तेरे रुखसार पर ।
Phool gufran
*फितरत*
*फितरत*
Dushyant Kumar
श्री राम भजन
श्री राम भजन
Khaimsingh Saini
नज़्म _ तन्हा कश्ती , तन्हा ये समन्दर है ,
नज़्म _ तन्हा कश्ती , तन्हा ये समन्दर है ,
Neelofar Khan
पर्वत दे जाते हैं
पर्वत दे जाते हैं
हिमांशु बडोनी (दयानिधि)
..
..
*प्रणय प्रभात*
My life's situation
My life's situation
Chahat
भेंट
भेंट
Harish Chandra Pande
समय
समय
Neeraj Agarwal
" वो क़ैद के ज़माने "
Chunnu Lal Gupta
तंग अंग  देख कर मन मलंग हो गया
तंग अंग देख कर मन मलंग हो गया
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
आप हो न
आप हो न
Dr fauzia Naseem shad
वो काल है - कपाल है,
वो काल है - कपाल है,
manjula chauhan
बचपन के वो दिन कितने सुहाने लगते है
बचपन के वो दिन कितने सुहाने लगते है
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
शिवनाथ में सावन
शिवनाथ में सावन
Santosh kumar Miri
*किसकी है यह भूमि सब ,किसकी कोठी कार (कुंडलिया)*
*किसकी है यह भूमि सब ,किसकी कोठी कार (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
तू  मेरी जान तू ही जिंदगी बन गई
तू मेरी जान तू ही जिंदगी बन गई
कृष्णकांत गुर्जर
आभ बसंती...!!!
आभ बसंती...!!!
Neelam Sharma
बारिश में नहा कर
बारिश में नहा कर
A🇨🇭maanush
पेड़ और नदी की गश्त
पेड़ और नदी की गश्त
Anil Kumar Mishra
2842.*पूर्णिका*
2842.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
एक उम्र बहानों में गुजरी,
एक उम्र बहानों में गुजरी,
पूर्वार्थ
बुढ़ादेव तुम्हें नमो-नमो
बुढ़ादेव तुम्हें नमो-नमो
नेताम आर सी
Loading...