Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
12 Nov 2023 · 1 min read

हमको मिलते जवाब

हमको मिलते जवाब थोड़ी हैं ।
ज़िंदगी के कई सवालों के ।।
डाॅ फौज़िया नसीम शाद

Language: Hindi
Tag: शेर
5 Likes · 124 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Dr fauzia Naseem shad
View all
You may also like:
जब अन्तस में घिरी हो, दुख की घटा अटूट,
जब अन्तस में घिरी हो, दुख की घटा अटूट,
महेश चन्द्र त्रिपाठी
"बिना पहचान के"
Dr. Kishan tandon kranti
कोंपलें फिर फूटेंगी
कोंपलें फिर फूटेंगी
Saraswati Bajpai
मुक्तक
मुक्तक
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
आजकल के लोगों के रिश्तों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करता है।
आजकल के लोगों के रिश्तों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करता है।
पूर्वार्थ
"शीशा और रिश्ता बड़े ही नाजुक होते हैं
शेखर सिंह
रखा जाता तो खुद ही रख लेते...
रखा जाता तो खुद ही रख लेते...
कवि दीपक बवेजा
अजब-गजब नट भील से, इस जीवन के रूप
अजब-गजब नट भील से, इस जीवन के रूप
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
तिरंगा
तिरंगा
Dr. Pradeep Kumar Sharma
मेरे पूर्ण मे आधा व आधे मे पुर्ण अहसास हो
मेरे पूर्ण मे आधा व आधे मे पुर्ण अहसास हो
Anil chobisa
मौसम जब भी बहुत सर्द होता है
मौसम जब भी बहुत सर्द होता है
Ajay Mishra
नदी की तीव्र धारा है चले आओ चले आओ।
नदी की तीव्र धारा है चले आओ चले आओ।
सत्यम प्रकाश 'ऋतुपर्ण'
23/125.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/125.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
201…. देवी स्तुति (पंचचामर छंद)
201…. देवी स्तुति (पंचचामर छंद)
Rambali Mishra
मालिक मेरे करना सहारा ।
मालिक मेरे करना सहारा ।
Buddha Prakash
खामोशियां आवाज़ करती हैं
खामोशियां आवाज़ करती हैं
Surinder blackpen
Mukar jate ho , apne wade se
Mukar jate ho , apne wade se
Sakshi Tripathi
प्रतीक्षा, प्रतियोगिता, प्रतिस्पर्धा
प्रतीक्षा, प्रतियोगिता, प्रतिस्पर्धा
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
कैसे अम्बर तक जाओगे
कैसे अम्बर तक जाओगे
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
💐प्रेम कौतुक-235💐
💐प्रेम कौतुक-235💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
कभी अंधेरे में हम साया बना हो,
कभी अंधेरे में हम साया बना हो,
goutam shaw
अखंड साँसें प्रतीक हैं, उद्देश्य अभी शेष है।
अखंड साँसें प्रतीक हैं, उद्देश्य अभी शेष है।
Manisha Manjari
आंख से गिरे हुए आंसू,
आंख से गिरे हुए आंसू,
नेताम आर सी
हिन्दी दिवस
हिन्दी दिवस
SHAMA PARVEEN
मिलेंगे कल जब हम तुम
मिलेंगे कल जब हम तुम
gurudeenverma198
सफर में जब चलो तो थोड़ा, कम सामान को रखना( मुक्तक )
सफर में जब चलो तो थोड़ा, कम सामान को रखना( मुक्तक )
Ravi Prakash
बदलाव
बदलाव
Shyam Sundar Subramanian
संत साईं बाबा
संत साईं बाबा
Pravesh Shinde
अब हम क्या करे.....
अब हम क्या करे.....
Umender kumar
अबस ही डर रहा था अब तलक मैं
अबस ही डर रहा था अब तलक मैं
Neeraj Naveed
Loading...