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12 Jun 2016 · 1 min read

“सोचकर देखो”

युग बदल रहा है तुम भी जरा बदल कर देखो,
मोह माया से दूर कहीं सीधे चलकर देखो !
———————————–
वक्त का सुरुर बहुत कुछ है कहता यहाँ,
मंज़िल है कहाँ तुम बस ये सोचकर देखो !
——————————–
आयेगा वक्त इस कदर तुम्हारा भी कभी ,
बडे हो गये हो ज़रा बडा सोचकर तो देखो!
———————————–
मिलेगा यहाँ फरिश्ते की तरह कोई,
अबकी बार भरोसा करके देखो !
——————————-
खुदा ने भेजा है तुम्हे किसी अच्छे के लिये यहाँ,
इस कदर कभी खुद को समझकर तो देखो !
————————————
आस्था भी निराधार भक्ति भी जरुरी यहाँ ,
सयंम कभी तो कभी खुद को शांत करके तो देखो !
————————————-
बदल गया यहाँ बहुत कुछ यहाँ ,
खुद को भरी नींद से ज़गा कर तो देखो !

Language: Hindi
Tag: कविता
1 Like · 274 Views
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