Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
8 May 2023 · 1 min read

सुख के क्षणों में हम दिल खोलकर हँस लेते हैं, लोगों से जी भरक

सुख के क्षणों में हम दिल खोलकर हँस लेते हैं, लोगों से जी भरकर बातें कर लेते हैं, पर जैसे जीवन में दुख दस्तक देते हैं हम रोने से बचने लगते हैं जबकि हमारे आँसू बह जाना चाहते हैं हम उनको रोके रखते हैं, रोना मनुष्य का नैसर्गिक गुण होता है।।
यहीं से शुरुआत होती है पीड़ा को पालने की ,हम लोगों को साबित करने में जुट जाते हैं कि हम कितने मजबूत है,खासकर मर्द क्योंकि समाज में मर्दों के लिए उनकी ही पितृसत्तात्मक व्यवस्था ने कह रखा है “मर्द को दर्द नही होता”।।
क्या सच में आपको दर्द नही होता??

368 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
तनिक लगे न दिमाग़ पर,
तनिक लगे न दिमाग़ पर,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
शिशिर ऋतु-१
शिशिर ऋतु-१
Vishnu Prasad 'panchotiya'
*मुर्गा की बलि*
*मुर्गा की बलि*
Dushyant Kumar
मां का आंचल(Happy mothers day)👨‍👩‍👧‍👧
मां का आंचल(Happy mothers day)👨‍👩‍👧‍👧
Ms.Ankit Halke jha
ग़ज़ल
ग़ज़ल
ईश्वर दयाल गोस्वामी
"मैं आज़ाद हो गया"
Lohit Tamta
जीवन
जीवन
Rekha Drolia
"ଜୀବନ ସାର୍ଥକ କରିବା ପାଇଁ ସ୍ୱାଭାବିକ ହାର୍ଦିକ ସଂଘର୍ଷ ଅନିବାର୍ଯ।"
Sidhartha Mishra
प्लास्टिक बंदी
प्लास्टिक बंदी
Dr. Pradeep Kumar Sharma
मेरी दोस्ती मेरा प्यार
मेरी दोस्ती मेरा प्यार
Ram Krishan Rastogi
usne kuchh is tarah tarif ki meri.....ki mujhe uski tarif pa
usne kuchh is tarah tarif ki meri.....ki mujhe uski tarif pa
Rakesh Singh
व्यक्तित्व की दुर्बलता
व्यक्तित्व की दुर्बलता
Dr fauzia Naseem shad
मैं भविष्य की चिंता में अपना वर्तमान नष्ट नहीं करता क्योंकि
मैं भविष्य की चिंता में अपना वर्तमान नष्ट नहीं करता क्योंकि
Rj Anand Prajapati
आज़ाद हूं मैं
आज़ाद हूं मैं
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
ख्वाबों से निकल कर कहां जाओगे
ख्वाबों से निकल कर कहां जाओगे
VINOD CHAUHAN
कभी वाकमाल चीज था, अभी नाचीज हूँ
कभी वाकमाल चीज था, अभी नाचीज हूँ
सिद्धार्थ गोरखपुरी
मित्र होना चाहिए
मित्र होना चाहिए
हिमांशु बडोनी (दयानिधि)
*जीवन खड़ी चढ़ाई सीढ़ी है सीढ़ियों में जाने का रास्ता है लेक
*जीवन खड़ी चढ़ाई सीढ़ी है सीढ़ियों में जाने का रास्ता है लेक
Shashi kala vyas
स्तंभ बिन संविधान
स्तंभ बिन संविधान
Mahender Singh
* ज्योति जगानी है *
* ज्योति जगानी है *
surenderpal vaidya
अनंत की ओर _ 1 of 25
अनंत की ओर _ 1 of 25
Kshma Urmila
बंसत पचंमी
बंसत पचंमी
Ritu Asooja
रै तमसा, तू कब बदलेगी…
रै तमसा, तू कब बदलेगी…
Anand Kumar
झूठा प्यार।
झूठा प्यार।
Sonit Parjapati
*सच पूछो तो बहुत दिया, तुमने आभार तुम्हारा 【हिंदी गजल/गीतिका
*सच पूछो तो बहुत दिया, तुमने आभार तुम्हारा 【हिंदी गजल/गीतिका
Ravi Prakash
दिवाली मुबारक नई ग़ज़ल विनीत सिंह शायर
दिवाली मुबारक नई ग़ज़ल विनीत सिंह शायर
Vinit kumar
*बिरहा की रात*
*बिरहा की रात*
Pushpraj Anant
■ हम होंगे कामयाब आज ही।
■ हम होंगे कामयाब आज ही।
*Author प्रणय प्रभात*
"तिलचट्टा"
Dr. Kishan tandon kranti
हमेशा एक स्त्री उम्र से नहीं
हमेशा एक स्त्री उम्र से नहीं
शेखर सिंह
Loading...