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11 Jun 2016 · 1 min read

*सीख*

ऐ सुमन मुरझा नहीँ तू मुस्कुराना सीख ले
मन चमन घबरा नहीँ तू खिलखिलाना सीख ले
प्रीत का पलड़ा रहा है हर घड़ी ही डोलता
वैर को अपने सदा ही तू भुलाना सीख ले
*धर्मेन्द्र अरोड़ा*

Language: Hindi
Tag: मुक्तक
1 Comment · 187 Views
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