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30 Oct 2016 · 1 min read

सिद्धान्तों की कीमत पर जीना मंजूर नही मुझे

समझौतों में स्वार्थ और लाचारी की बू आती है,
आत्म-सम्मान स्वाभिमान मृत सैया पर ही नजर आती है,
बेआबरू हो कर जीना,खुद को खुद से ही छलना,
फिर जिंदगी की कौड़ी कीमत भी शेष नही रह जाती l

खुद्दार बनो इतनी गौरत भी बचा के रखो,
फिर वो रूठे या कोई छूटे..
पर सिद्धसांतो की कीमत पर रिस्ते निभाना मंजूर नही,
क्योंकि मृत सैया पर बैठ, जीवन का स्वप्न मंजूर नही मुझे l

Language: Hindi
Tag: शेर
392 Views
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