Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
3 Jun 2021 · 1 min read

सावन बरसता है उधर….

सावन बरसता है…..

सावन बरसता है उधर, इधर दो नैन बरसते हैं।
चाह में तुम्हारी आज भी हम, दिन-रैन तरसते हैं।

प्यास-तपन सब मिटी, धरा हर्ष-मगन इठलाए।
आक-जवास के जैसे, मेरे अरमान झुलसते हैं।

जाकर फिर न पलटे, परदेसी कहाँ तुम भूले ?
खोज में कबसे तुम्हारी, हम दर-दर भटकते हैं।

तसव्वुर में संग तुम्हारे, यूँ तो हम जी लेते हैं।
पर एक झलक पाने को, ये मन-प्रान तरसते हैं।

बिन तुम्हारे सूना-सूना, घर का कोना-कोना।
आँगन तरसता है, सूने दर-ओ-दीवार तरसते हैं।

कितना तुम्हें चाहा, पर जुबां पे नाम न आया।
कहने में बात दिल की, हम अब भी हिचकते हैं।

बीच भँवर में छोड़ नैया, जाने किस ओर मुड़े।
मिल बुने जो साथ तुम्हारे, वो ख्वाब किलसते हैं।

रक्खे तुम्हें सलामत, दुआ कुबूले रब ‘सीमा’ की।
करुण रुदन से आर्तस्वरा के, पाहन भी पिघलते हैं।

– डॉ.सीमा अग्रवाल
मुरादाबाद (उ.प्र)

2 Likes · 2 Comments · 394 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from डॉ.सीमा अग्रवाल
View all
You may also like:
"" *स्वस्थ शरीर है पावन धाम* ""
सुनीलानंद महंत
तुम जो हमको छोड़ चले,
तुम जो हमको छोड़ चले,
कृष्णकांत गुर्जर
बंदर का खेल!
बंदर का खेल!
कविता झा ‘गीत’
👰🏾‍♀कजरेली👰🏾‍♀
👰🏾‍♀कजरेली👰🏾‍♀
सुरेश अजगल्ले 'इन्द्र '
तारिणी वर्णिक छंद का विधान
तारिणी वर्णिक छंद का विधान
Subhash Singhai
दोहे
दोहे
डॉक्टर रागिनी
चाँद तारे गवाह है मेरे
चाँद तारे गवाह है मेरे
shabina. Naaz
#कहानी-
#कहानी-
*Author प्रणय प्रभात*
मैं नारी हूं...!
मैं नारी हूं...!
singh kunwar sarvendra vikram
.
.
Amulyaa Ratan
मरने से पहले / मुसाफ़िर बैठा
मरने से पहले / मुसाफ़िर बैठा
Dr MusafiR BaithA
मुझे तुमसे प्यार हो गया,
मुझे तुमसे प्यार हो गया,
Dr. Man Mohan Krishna
जीवन में ठहरे हर पतझड़ का बस अंत हो
जीवन में ठहरे हर पतझड़ का बस अंत हो
Dr Tabassum Jahan
सबसे कठिन है
सबसे कठिन है
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
दोहा
दोहा
गुमनाम 'बाबा'
खाली सूई का कोई मोल नहीं 🙏
खाली सूई का कोई मोल नहीं 🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
बिना वजह जब हो ख़ुशी, दुवा करे प्रिय नेक।
बिना वजह जब हो ख़ुशी, दुवा करे प्रिय नेक।
आर.एस. 'प्रीतम'
"तकलीफ़"
Dr. Kishan tandon kranti
देख लूँ गौर से अपना ये शहर
देख लूँ गौर से अपना ये शहर
Shweta Soni
सफलता मिलना कब पक्का हो जाता है।
सफलता मिलना कब पक्का हो जाता है।
Yogi Yogendra Sharma : Motivational Speaker
हर एक राज को राज ही रख के आ गए.....
हर एक राज को राज ही रख के आ गए.....
कवि दीपक बवेजा
3149.*पूर्णिका*
3149.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
भीनी भीनी आ रही सुवास है।
भीनी भीनी आ रही सुवास है।
Omee Bhargava
दोस्ती
दोस्ती
Surya Barman
संस्कार और अहंकार में बस इतना फर्क है कि एक झुक जाता है दूसर
संस्कार और अहंकार में बस इतना फर्क है कि एक झुक जाता है दूसर
Rj Anand Prajapati
तुम्हारा घर से चला जाना
तुम्हारा घर से चला जाना
Dheerja Sharma
मां की आँखों में हीरे चमकते हैं,
मां की आँखों में हीरे चमकते हैं,
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
आंगन महक उठा
आंगन महक उठा
Harminder Kaur
पानी की तस्वीर तो देखो
पानी की तस्वीर तो देखो
VINOD CHAUHAN
खाता काल मनुष्य को, बिछड़े मन के मीत (कुंडलिया)
खाता काल मनुष्य को, बिछड़े मन के मीत (कुंडलिया)
Ravi Prakash
Loading...