Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
10 Jun 2018 · 1 min read

सहमा उपवन

सहमा उपवन छाया कुहास
अलि मौन शांत बीता सुहास
कलिओं के बीच सहमी तितली
किसलिए पीर क्यों जग उदास..

आगंतुक न कोई आया न गया
किसलिए शुष्क व्यवहार नया
क्यों धरा ह्रदय रोया जर्जर
क्यों निशा दिखे अति घोर निडर
जगती का निर्बल भाल हुआ

क्यों लगे सहस सब व्यर्थ प्रयास
किसलिए पीर क्यों जग उदास..
सहमा उपवन छाया कुहास..

क्यों छिन्न भिन्न गरिमा सिसके
संबंधों के दीपक ठिठके
बुझती लौ रिश्ते नातों की
भावों के झंझावातों की
किस रक्त से अंबर लाल हुआ

उजले दिन से हो तम का भास
किसलिए पीर क्यों जग उदास..
सहमा उपवन छाया कुहास..

पुहुपों का मसला जाता है
छिपता क्यों आज विधाता है
क्यों देख असुर नर्तन भीषण
क्यों देख रुदन पीड़ा शोषण
नहीं फिर से क्यों अवतार हुआ

हे ईश्वर तेरा ये उपहास
किसलिए पीर क्यों जग उदास..
सहमा उपवन छाया कुहास..

©®
अंकिता कुलश्रेष्ठ
आगरा

Language: Hindi
Tag: गीत
3 Likes · 543 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
माँ
माँ
Harminder Kaur
बेरोजगारी मंहगायी की बातें सब दिन मैं ही  दुहराता हूँ,  फिरभ
बेरोजगारी मंहगायी की बातें सब दिन मैं ही दुहराता हूँ, फिरभ
DrLakshman Jha Parimal
गुरुकुल शिक्षा पद्धति
गुरुकुल शिक्षा पद्धति
विजय कुमार अग्रवाल
इंसान भी तेरा है
इंसान भी तेरा है
Dr fauzia Naseem shad
फर्क तो पड़ता है
फर्क तो पड़ता है
Dr. Pradeep Kumar Sharma
#आह्वान_तंत्र_का
#आह्वान_तंत्र_का
*प्रणय प्रभात*
हर बार नहीं मनाना चाहिए महबूब को
हर बार नहीं मनाना चाहिए महबूब को
शेखर सिंह
गंगा मैया
गंगा मैया
Kumud Srivastava
बालको से पग पग पर अपराध होते ही रहते हैं।उन्हें केवल माता के
बालको से पग पग पर अपराध होते ही रहते हैं।उन्हें केवल माता के
Shashi kala vyas
जात आदमी के
जात आदमी के
AJAY AMITABH SUMAN
धीरे _धीरे ही सही _ गर्मी बीत रही है ।
धीरे _धीरे ही सही _ गर्मी बीत रही है ।
Rajesh vyas
सकारात्मकता
सकारात्मकता
Sangeeta Beniwal
मानवता है धर्म सत,रखें सभी हम ध्यान।
मानवता है धर्म सत,रखें सभी हम ध्यान।
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
ढूंढ रहा है अध्यापक अपना वो अस्तित्व आजकल
ढूंढ रहा है अध्यापक अपना वो अस्तित्व आजकल
कृष्ण मलिक अम्बाला
"सोचिए जरा"
Dr. Kishan tandon kranti
किस कदर है व्याकुल
किस कदर है व्याकुल
सुशील मिश्रा ' क्षितिज राज '
बोला कौवा क्या करूॅं ,मोटी है आवाज( कुंडलिया)
बोला कौवा क्या करूॅं ,मोटी है आवाज( कुंडलिया)
Ravi Prakash
हम तो हैं प्रदेश में, क्या खबर हमको देश की
हम तो हैं प्रदेश में, क्या खबर हमको देश की
gurudeenverma198
याद आते हैं
याद आते हैं
Juhi Grover
3154.*पूर्णिका*
3154.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
हट जा भाल से रेखा
हट जा भाल से रेखा
Suryakant Dwivedi
!! गुलशन के गुल !!
!! गुलशन के गुल !!
Chunnu Lal Gupta
"मनुज बलि नहीं होत है - होत समय बलवान ! भिल्लन लूटी गोपिका - वही अर्जुन वही बाण ! "
Atul "Krishn"
हमारा ऐसा हो गणतंत्र।
हमारा ऐसा हो गणतंत्र।
सत्य कुमार प्रेमी
नीलेश
नीलेश
Dhriti Mishra
आशा का दीप
आशा का दीप
krishna waghmare , कवि,लेखक,पेंटर
मंजिल तक पहुँचने के लिए
मंजिल तक पहुँचने के लिए
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
शब्दों की अहमियत को कम मत आंकिये साहिब....
शब्दों की अहमियत को कम मत आंकिये साहिब....
Dr. Akhilesh Baghel "Akhil"
अपनी हिंदी
अपनी हिंदी
Dr.Priya Soni Khare
🍁
🍁
Amulyaa Ratan
Loading...