Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
4 May 2024 · 2 min read

समन्वय

नर से नारी का आदर सत्कार समन्वय नितांत है जरूरी ।
प्रकृति ने सौंपी है बौद्धिक अन्वेषण की कुंजी इन दोनों को ।

प्रतिकर्ष परस्पर झुकना झुकाना रूठ जाना और मनाना ।
इस सब के बीच ही आपसी चाहत की जरूरत हो भुनाना ।

जिद्द न हो प्रतिस्पर्धा हो आपस में समझौता मगर सबसे पहले हो ।
उलझाव के परित्याग का देखो आलिंगन है एक दूसरे को समझना ।

तूने ये कहा वो भी मुझ से अब देखना मैं तेरा क्या हाल करूंगा ।
अरे नायक जिसे नाक पूँछनी जिस नायिका ने हो सिखाई ।

माँ थी वो उसी के गर्भ से उद्भव हुआ तेरा कैसे चिल्ला सकता है ।
सोच जरा गहरे से शांति से एय मानव प्रकृति का चितेरा ।

प्रेम से प्रेम का रखते हुये सम्मान कहना होता है वो जो यदि जरूरी श्रीमान ।
तमो गुण से ज्यादा रजोगुण कूटनीति के परिकल्पित करते यही स्वप्न साकार दे वरदान ।

हम कौन यहाँ स्थाई हम जातक अजन्मे अस्थाई श्वास तक नहीं बस में हमारे ।
माँ थी वो उसी के गर्भ से उद्भव हुआ तेरा कैसे चिल्ला सकता है ।

नर से नारी का आदर सत्कार समन्वय नितांत है जरूरी ।
प्रकृति ने सौंपी है बौद्धिक अन्वेषण की कुंजी इन दोनों को ।

मिल कर प्रयास दोनों का रचता सृजन खास सन्मार्गी दोनों सा ।
नख शिख नयन नक्श चेहरा तेरे सा उआ उसके कटीले तेवर सा ।

जरूरी तो नहीं लेकिन शत प्रतिशत लेकिन लगभग हम दोनों सा ।
पहचान बन जाएगा तेरे बाद उसके बाद लोगों को याद दिलाएगा ।

माँ थी वो उसी के गर्भ से उद्भव हुआ तेरा कैसे चिल्ला सकता है ।
सोच जरा गहरे से शांति से एय मानव प्रकृति का चितेरा ।

32 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from DR ARUN KUMAR SHASTRI
View all
You may also like:
ऐसा बेजान था रिश्ता कि साँस लेता रहा
ऐसा बेजान था रिश्ता कि साँस लेता रहा
Shweta Soni
सूरज नमी निचोड़े / (नवगीत)
सूरज नमी निचोड़े / (नवगीत)
ईश्वर दयाल गोस्वामी
16.5.24
16.5.24
sushil yadav
"बेरोजगार या दलालों का व्यापार"
Mukta Rashmi
"ऐसी कोई रात नहीं"
Dr. Kishan tandon kranti
#लानत_के_साथ...
#लानत_के_साथ...
*प्रणय प्रभात*
नव दीप जला लो
नव दीप जला लो
Mukesh Kumar Sonkar
विधा - गीत
विधा - गीत
Harminder Kaur
प्रयास जारी रखें
प्रयास जारी रखें
Mahender Singh
तस्वीर तुम्हारी देखी तो
तस्वीर तुम्हारी देखी तो
VINOD CHAUHAN
दोस्तो जिंदगी में कभी कभी ऐसी परिस्थिति आती है, आप चाहे लाख
दोस्तो जिंदगी में कभी कभी ऐसी परिस्थिति आती है, आप चाहे लाख
Sunil Maheshwari
रंग उकेरे तूलिका,
रंग उकेरे तूलिका,
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
అమ్మా తల్లి బతుకమ్మ
అమ్మా తల్లి బతుకమ్మ
डॉ गुंडाल विजय कुमार 'विजय'
उल्लाला छंद विधान (चन्द्रमणि छन्द) सउदाहरण
उल्लाला छंद विधान (चन्द्रमणि छन्द) सउदाहरण
Subhash Singhai
बेटी है हम हमें भी शान से जीने दो
बेटी है हम हमें भी शान से जीने दो
SHAMA PARVEEN
विडंबना
विडंबना
Shyam Sundar Subramanian
अहसासे ग़मे हिज्र बढ़ाने के लिए आ
अहसासे ग़मे हिज्र बढ़ाने के लिए आ
Sarfaraz Ahmed Aasee
मंजिल न मिले
मंजिल न मिले
Meera Thakur
ऐसा क्या लिख दू मैं.....
ऐसा क्या लिख दू मैं.....
Taj Mohammad
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
ज़िन्दगी की बोझ यूँ ही उठाते रहेंगे हम,
ज़िन्दगी की बोझ यूँ ही उठाते रहेंगे हम,
Anand Kumar
त्योहार
त्योहार
Dr. Pradeep Kumar Sharma
विश्व पर्यावरण दिवस
विश्व पर्यावरण दिवस
Surinder blackpen
ख़ुद को ख़ोकर
ख़ुद को ख़ोकर
Dr fauzia Naseem shad
2661.*पूर्णिका*
2661.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
ठोकरें आज भी मुझे खुद ढूंढ लेती हैं
ठोकरें आज भी मुझे खुद ढूंढ लेती हैं
Manisha Manjari
नहीं रखा अंदर कुछ भी दबा सा छुपा सा
नहीं रखा अंदर कुछ भी दबा सा छुपा सा
Rekha Drolia
अफवाह एक ऐसा धुआं है को बिना किसी आग के उठता है।
अफवाह एक ऐसा धुआं है को बिना किसी आग के उठता है।
Rj Anand Prajapati
वृंदा तुलसी पेड़ स्वरूपा
वृंदा तुलसी पेड़ स्वरूपा
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
*चुनावी कुंडलिया*
*चुनावी कुंडलिया*
Ravi Prakash
Loading...