Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
22 Jul 2023 · 1 min read

सच नहीं है कुछ भी, मैने किया है

सच नहीं है कुछ भी, मैने किया है
सच तो ये है, सब उसी का दिया है
शौहरत, दौलत, करम है उसी का
कुछ भी जो पाया, उसी से लिया है
महावीर उत्तरांचली

1 Like · 211 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
View all
You may also like:
फिर पर्दा क्यूँ है?
फिर पर्दा क्यूँ है?
Pratibha Pandey
3060.*पूर्णिका*
3060.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
शायरी
शायरी
goutam shaw
क्या विरासत में हिस्सा मिलता है
क्या विरासत में हिस्सा मिलता है
Dr fauzia Naseem shad
*डूबतों को मिलता किनारा नहीं*
*डूबतों को मिलता किनारा नहीं*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
मौसम खराब है
मौसम खराब है
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
बेवजह ही रिश्ता बनाया जाता
बेवजह ही रिश्ता बनाया जाता
Keshav kishor Kumar
कृष्ण की फितरत राधा की विरह
कृष्ण की फितरत राधा की विरह
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
संवेदनाओं का भव्य संसार
संवेदनाओं का भव्य संसार
Ritu Asooja
नाजायज इश्क
नाजायज इश्क
RAKESH RAKESH
जिस दिन हम ज़मी पर आये ये आसमाँ भी खूब रोया था,
जिस दिन हम ज़मी पर आये ये आसमाँ भी खूब रोया था,
Ranjeet kumar patre
वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
वाह ! मेरा देश किधर जा रहा है ।
कृष्ण मलिक अम्बाला
*आए जब से राम हैं, चारों ओर वसंत (कुंडलिया)*
*आए जब से राम हैं, चारों ओर वसंत (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
सब कुछ छोड़ कर जाना पड़ा अकेले में
सब कुछ छोड़ कर जाना पड़ा अकेले में
कवि दीपक बवेजा
जिंदगी बंद दरवाजा की तरह है
जिंदगी बंद दरवाजा की तरह है
Harminder Kaur
चल बन्दे.....
चल बन्दे.....
Srishty Bansal
सच के साथ ही जीना सीखा सच के साथ ही मरना
सच के साथ ही जीना सीखा सच के साथ ही मरना
Er. Sanjay Shrivastava
#दोहा
#दोहा
*Author प्रणय प्रभात*
हौंसले को समेट कर मेघ बन
हौंसले को समेट कर मेघ बन
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
Never forget
Never forget
Dhriti Mishra
यह क्या अजीब ही घोटाला है,
यह क्या अजीब ही घोटाला है,
Sukoon
चौथ मुबारक हो तुम्हें शुभ करवा के साथ।
चौथ मुबारक हो तुम्हें शुभ करवा के साथ।
सत्य कुमार प्रेमी
"पतवार बन"
Dr. Kishan tandon kranti
गज़ल सी कविता
गज़ल सी कविता
Kanchan Khanna
किसी अंधेरी कोठरी में बैठा वो एक ब्रम्हराक्षस जो जानता है सब
किसी अंधेरी कोठरी में बैठा वो एक ब्रम्हराक्षस जो जानता है सब
Utkarsh Dubey “Kokil”
दोहा-
दोहा-
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
पैमाना सत्य का होता है यारों
पैमाना सत्य का होता है यारों
प्रेमदास वसु सुरेखा
राखी
राखी
Shashi kala vyas
"In the tranquil embrace of the night,
Manisha Manjari
रोज गमों के प्याले पिलाने लगी ये जिंदगी लगता है अब गहरी नींद
रोज गमों के प्याले पिलाने लगी ये जिंदगी लगता है अब गहरी नींद
कृष्णकांत गुर्जर
Loading...