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8 May 2018 · 1 min read

संस्कार

श्यामल वर्ण हैं दोनों भैया।
मुख पे तेज सजाय रहे,

राम लखन सी सुन्दर जोड़ी,
मन्द – मन्द मुसकाय रहे।

हाथन को लिए लकुटी कमलीया,
कंधन झोली बंधाय रहे।

ब्रह्मचर्य के रक्षण को ये,
भिक्षाटन को जाय रहे।

कुछ हाथन कुछ झोली भरे
हैं,
पग – पग पाव बढाय रहे।

धर्म की खातिर बन ये भिक्षुक
धर्म ध्वजा फहराय रहे।

©®पं.संजीव शुक्ल “सचिन”

Language: Hindi
501 Views
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