Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
7 Oct 2023 · 1 min read

श्राद्ध पक्ष के दोहे

श्राद्ध पक्ष के कुछ दोहे. . . . .

घर- घर पूजे श्राद्ध में, पितरों को संतान ।
श्रद्धा पूरित भाव से, उनको दे सम्मान ।।

श्राद्ध सनातन रीत है, श्राद्ध पितर सम्मान ।
सच्चे मन से मानिए, श्राद्ध शास्त्र विधान ।।

श्राद्ध पक्ष में पूजती, पुरखों को सन्तान ।
श्रद्धा से तर्पण करें, उनका कर के ध्यान ।।

श्राद्ध पक्ष विचरण करें , पितर धरा के पास।
आकर दें आशीष वो , ऐसा है विश्वास ।।

जीते जी माँ बाप का, सदा करो सम्मान ।
जा कर मिलते श्राद्ध में, मात-पिता भगवान ।।

सुशील सरना /
मौलिक एवं स्वरचित

Language: Hindi
161 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
पत्ते बिखरे, टूटी डाली
पत्ते बिखरे, टूटी डाली
Arvind trivedi
स्मृतियाँ  है प्रकाशित हमारे निलय में,
स्मृतियाँ है प्रकाशित हमारे निलय में,
पंकज पाण्डेय सावर्ण्य
समय और मौसम सदा ही बदलते रहते हैं।इसलिए स्वयं को भी बदलने की
समय और मौसम सदा ही बदलते रहते हैं।इसलिए स्वयं को भी बदलने की
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
मुझे भी लगा था कभी, मर्ज ऐ इश्क़,
मुझे भी लगा था कभी, मर्ज ऐ इश्क़,
डी. के. निवातिया
कुछ लोग घूमते हैं मैले आईने के साथ,
कुछ लोग घूमते हैं मैले आईने के साथ,
Sanjay ' शून्य'
लहर-लहर दीखे बम लहरी, बम लहरी
लहर-लहर दीखे बम लहरी, बम लहरी
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
दर्पण
दर्पण
लक्ष्मी सिंह
सपने
सपने
Divya kumari
अहमियत 🌹🙏
अहमियत 🌹🙏
तारकेश्‍वर प्रसाद तरुण
Wishing you a very happy,
Wishing you a very happy,
DrChandan Medatwal
माटी कहे पुकार
माटी कहे पुकार
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
लफ्जों के तीर बड़े तीखे होते हैं जनाब
लफ्जों के तीर बड़े तीखे होते हैं जनाब
Shubham Pandey (S P)
गलतियां सुधारी जा सकती है,
गलतियां सुधारी जा सकती है,
Tarun Singh Pawar
शुभ प्रभात मित्रो !
शुभ प्रभात मित्रो !
Mahesh Jain 'Jyoti'
तूफ़ान और मांझी
तूफ़ान और मांझी
DESH RAJ
वर्षों जहां में रहकर
वर्षों जहां में रहकर
पूर्वार्थ
"राज़-ए-इश्क़" ग़ज़ल
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
बिल्ले राम
बिल्ले राम
Kanchan Khanna
*पुरस्कार का पात्र वही, जिसका संघर्ष नवल हो (मुक्तक)*
*पुरस्कार का पात्र वही, जिसका संघर्ष नवल हो (मुक्तक)*
Ravi Prakash
रणजीत कुमार शुक्ल
रणजीत कुमार शुक्ल
Ranjeet Kumar Shukla
हम जियें  या मरें  तुम्हें क्या फर्क है
हम जियें या मरें तुम्हें क्या फर्क है
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
■ यादों का झरोखा...
■ यादों का झरोखा...
*Author प्रणय प्रभात*
जिसे सुनके सभी झूमें लबों से गुनगुनाएँ भी
जिसे सुनके सभी झूमें लबों से गुनगुनाएँ भी
आर.एस. 'प्रीतम'
*अज्ञानी की मन गण्ड़त*
*अज्ञानी की मन गण्ड़त*
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
किस्मत की लकीरें
किस्मत की लकीरें
Dr Parveen Thakur
तू है तो फिर क्या कमी है
तू है तो फिर क्या कमी है
Surinder blackpen
2995.*पूर्णिका*
2995.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
कोई काम हो तो बताना
कोई काम हो तो बताना
Shekhar Chandra Mitra
हर सुबह जन्म लेकर,रात को खत्म हो जाती हूं
हर सुबह जन्म लेकर,रात को खत्म हो जाती हूं
Pramila sultan
जिंदगी
जिंदगी
विजय कुमार अग्रवाल
Loading...