Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 Jul 2016 · 1 min read

शैर

तरक़्क़ियों के नशे में ख़ुदी को भूल गया.,
जो रहनुमा था, मुसाफ़िर उसी को भूल गया.!
तमाम रात लड़ी जंग जिन चराग़ों ने.,
सहर हुई तो ज़माना उन्ही को भूल गया..!!

( ख़ुमार देहल्वी )
१४/०७/२०१६

Language: Hindi
Tag: शेर
1 Like · 1 Comment · 468 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
जुबां पर मत अंगार रख बरसाने के लिए
जुबां पर मत अंगार रख बरसाने के लिए
Anil Mishra Prahari
“ दुमका संस्मरण ” ( विजली ) (1958)
“ दुमका संस्मरण ” ( विजली ) (1958)
DrLakshman Jha Parimal
Charlie Chaplin truly said:
Charlie Chaplin truly said:
Vansh Agarwal
उन से कहना था
उन से कहना था
हिमांशु Kulshrestha
पता नहीं था शायद
पता नहीं था शायद
Pratibha Pandey
हम तुम्हें लिखना
हम तुम्हें लिखना
Dr fauzia Naseem shad
हर दर्द से था वाकिफ हर रोज़ मर रहा हूं ।
हर दर्द से था वाकिफ हर रोज़ मर रहा हूं ।
Phool gufran
शहज़ादी
शहज़ादी
Satish Srijan
ना जाने क्यों तुम,
ना जाने क्यों तुम,
Dr. Man Mohan Krishna
जीवन को पैगाम समझना पड़ता है
जीवन को पैगाम समझना पड़ता है
कवि दीपक बवेजा
जबसे तुमसे लौ लगी, आए जगत न रास।
जबसे तुमसे लौ लगी, आए जगत न रास।
डॉ.सीमा अग्रवाल
2- साँप जो आस्तीं में पलते हैं
2- साँप जो आस्तीं में पलते हैं
Ajay Kumar Vimal
गांधीजी का भारत
गांधीजी का भारत
विजय कुमार अग्रवाल
इंद्रधनुष सा यह जीवन अपना,
इंद्रधनुष सा यह जीवन अपना,
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
कर्म कांड से बचते बचाते.
कर्म कांड से बचते बचाते.
Mahender Singh
हमें तो देखो उस अंधेरी रात का भी इंतजार होता है
हमें तो देखो उस अंधेरी रात का भी इंतजार होता है
VINOD CHAUHAN
प्रणय-निवेदन
प्रणय-निवेदन
Shekhar Chandra Mitra
पंचशील गीत
पंचशील गीत
Buddha Prakash
जानो धन चंचल महा, सही चंचला नाम(कुंडलिया)
जानो धन चंचल महा, सही चंचला नाम(कुंडलिया)
Ravi Prakash
इतनी खुबसूरत नही होती मोहब्बत जितनी शायरो ने बना रखी है,
इतनी खुबसूरत नही होती मोहब्बत जितनी शायरो ने बना रखी है,
पूर्वार्थ
2723.*पूर्णिका*
2723.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
जिनकी आंखों को धूप चुभे
जिनकी आंखों को धूप चुभे
*Author प्रणय प्रभात*
खुद को परोस कर..मैं खुद को खा गया
खुद को परोस कर..मैं खुद को खा गया
सिद्धार्थ गोरखपुरी
मन से भी तेज ( 3 of 25)
मन से भी तेज ( 3 of 25)
Kshma Urmila
होली के रंग
होली के रंग
Anju ( Ojhal )
माँ से बढ़कर नहीं है कोई
माँ से बढ़कर नहीं है कोई
जगदीश लववंशी
डॉ. नामवर सिंह की दृष्टि में कौन-सी कविताएँ गम्भीर और ओजस हैं??
डॉ. नामवर सिंह की दृष्टि में कौन-सी कविताएँ गम्भीर और ओजस हैं??
कवि रमेशराज
💐प्रेम कौतुक-198💐
💐प्रेम कौतुक-198💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
कभी मिले नहीं है एक ही मंजिल पर जानें वाले रास्तें
कभी मिले नहीं है एक ही मंजिल पर जानें वाले रास्तें
Sonu sugandh
तुम्हारी जय जय चौकीदार
तुम्हारी जय जय चौकीदार
Shyamsingh Lodhi (Tejpuriya)
Loading...