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Aug 4, 2016 · 1 min read

शेर

बाँट सकूं गम तुम्हारे बस इतनी सी तमन्ना है!
खुशियों में गर शामिल न करो तो कोई गम नहीं है!!!

रहते हैं संग-संग बहते हैं संग- संग,फिर भी जाने क्यों है दूरियां इतनी!
यूंही चलते-चलते उम्र भर कभी मिल नहीं पाते,जाने कैसे वो दो किनारे हैं!!!

मेरे उसूल मुझे अकसर रूला देते हैं !
कोई शक्ति है जो उन पर चलने की हिम्मत दे जाती है!!!
कामनी गुप्ता ***

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