Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
25 Nov 2023 · 1 min read

वेदना ऐसी मिल गई कि मन प्रदेश में हाहाकार मच गया,

वेदना ऐसी मिल गई कि मन प्रदेश में हाहाकार मच गया,
ह्रदय भी मार्मिक होने पर तत्पर हो गया,
अश्रु धारा इतनी प्रबल हो गई,
हे द्वारिकाधीश ये कैसी लीला आपने रचा दी।

1 Like · 229 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
*प्रेमचंद (पॉंच दोहे)*
*प्रेमचंद (पॉंच दोहे)*
Ravi Prakash
"सुबह की किरणें "
Yogendra Chaturwedi
Legal Quote
Legal Quote
GOVIND UIKEY
"लक्ष्य"
Dr. Kishan tandon kranti
मै तो हूं मद मस्त मौला
मै तो हूं मद मस्त मौला
नेताम आर सी
#तेवरी / #त्यौहार_गए
#तेवरी / #त्यौहार_गए
*Author प्रणय प्रभात*
चट्टानी अडान के आगे शत्रु भी झुक जाते हैं, हौसला बुलंद हो तो
चट्टानी अडान के आगे शत्रु भी झुक जाते हैं, हौसला बुलंद हो तो
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
घर-घर एसी लग रहे, बढ़ा धरा का ताप।
घर-घर एसी लग रहे, बढ़ा धरा का ताप।
डॉ.सीमा अग्रवाल
अपने आमाल पे
अपने आमाल पे
Dr fauzia Naseem shad
अपने-अपने चक्कर में,
अपने-अपने चक्कर में,
Dr. Man Mohan Krishna
बोझ
बोझ
Dr. Pradeep Kumar Sharma
Being an ICSE aspirant
Being an ICSE aspirant
Sukoon
शहीद की पत्नी
शहीद की पत्नी
नन्दलाल सुथार "राही"
21)”होली पर्व”
21)”होली पर्व”
Sapna Arora
साजिशन दुश्मन की हर बात मान लेता है
साजिशन दुश्मन की हर बात मान लेता है
Maroof aalam
❤बिना मतलब के जो बात करते है
❤बिना मतलब के जो बात करते है
Satyaveer vaishnav
शेखर सिंह
शेखर सिंह
शेखर सिंह
رام کے نام کی سب کو یہ دہائی دینگے
رام کے نام کی سب کو یہ دہائی دینگے
अरशद रसूल बदायूंनी
अस्तित्व
अस्तित्व
Shyam Sundar Subramanian
💐प्रेम कौतुक-358💐
💐प्रेम कौतुक-358💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
साल को बीतता देखना।
साल को बीतता देखना।
Brijpal Singh
बचपन अपना अपना
बचपन अपना अपना
Sanjay ' शून्य'
अधीर मन खड़ा हुआ  कक्ष,
अधीर मन खड़ा हुआ कक्ष,
Nanki Patre
धर्म ज्योतिष वास्तु अंतराष्ट्रीय सम्मेलन
धर्म ज्योतिष वास्तु अंतराष्ट्रीय सम्मेलन
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
गुरुपूर्व प्रकाश उत्सव बेला है आई
गुरुपूर्व प्रकाश उत्सव बेला है आई
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
कविता: माँ मुझको किताब मंगा दो, मैं भी पढ़ने जाऊंगा।
कविता: माँ मुझको किताब मंगा दो, मैं भी पढ़ने जाऊंगा।
Rajesh Kumar Arjun
हे कान्हा
हे कान्हा
Mukesh Kumar Sonkar
पत्थर दिल समझा नहीं,
पत्थर दिल समझा नहीं,
sushil sarna
बलिदानी सिपाही
बलिदानी सिपाही
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
चलो आज कुछ बात करते है
चलो आज कुछ बात करते है
Rituraj shivem verma
Loading...