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13 Apr 2018 · 1 min read

विलासिता

कमरे में बंद विलासिता
बाहर के अंधकार के
दर्द से बेखबर
रात भर अठखेलियाॅ करती रही।
भीतर की मिश्रित
खिलखिलाती
मधुर ध्वनि
बाहर के अंधकार का
मखौल उडाती रही।
रजनी स्वयं के अंधकार में
रोते बिलखते स्वर सुन
भौर तक काॅपती रही।
और अंदर भौर होकर भी
रात ही मचलती रही।

Language: Hindi
1 Like · 455 Views
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