Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
5 Feb 2017 · 2 min read

विजेता

विजेता की पृष्ठ संख्या सात पढ़िए।

हमेशा की तरह वह घी,आचार और फलों का थैला भरकर अपने साथ लाई थी।
नीमो ने रोते-सुबकते हुए अपनी माँ को दो दिन पहले घटी घटना बता दी। अपनी बेटी की बात सुनकर बुढ़िया बोली,”बेटी नीमो,मैं इस्से खात्तर भेजी सूं बाबा जी महाराज नै।”
“बाबा महाराज कौण माँ?”
“न्यू समझ ले के बाबा ऊपरवाले का रूप सै। वो पाँच साल तक का करम बतावै सै। लोग उसनै पाँचबरसी बाबा कहवैं सैं।”
“पर माँ उसतैं हमनै के—।”
बीच में ही वह बुढ़िया बोली,”हाथ जोड़के इब्बै माफी मांग नीमो। वो भगवान का सच्चा भगत सै। दूत सै वो लीली छतरी वाले का।”
नीमो ने अपनी माँ की बातों से प्रभावित होकर कहा,”हे बाबा जी महाराज मन्नै माफी देणा।”
रात को खाने के दौरान बुढिया ने अपने दामाद व बेटी से कहा,”इबकै पणवासी नै थाहम दोनों बाबा जी के धाम पर जाणा।”
अपनी सास की यह बात सुनकर राजाराम ने हंसकर कहा,”मां जी! आप जैसे लोगों को बहकाना ज्यादा मुश्किल काम नहीं होता।”
“माफी मांग बेटा। वो बाबा जी सब कुछ जाणै सै।”
“मां जी, मैं इन बातों को नहीं मानता।” अपने पति को जिद करते देख नीमो ने कहा,”एक बै जाणे म्ह के लगै सै?”
“पर नीमो, बिना कुछ किए ही लोग शक की निगाह से देखते हैं।बाबा के पास चले गए तो लोग गाँव ही छुड़वा देंगे।”
“न्यू क्यूं छुड़वा देंगे? अठे बैठक म्ह बैठण आले सारे ताऊ-दादे अपणा साथ देवैंगो। मेरा मन न्यू कहवैसै के आप्पां नै एक बै जरूर चलणो चाहिए।”
“ठीक है नीमो। तूं ऐसा सोचती है तो मैं चल पड़ूंगा, बाकी ये सब बहम से ज्यादा कुछ नहीं है। ”
उसकी यह बात सुनकर नीमो तथा बुढ़िया एक साथ बोल पड़ी,”बाबा जी बुरा मत मान लेणा।”
उनकी यह मूर्खता देखकर राजाराम वहाँ से उठकर चला गया। उसके जाते ही बुढ़़िया ने नीमो को बताना शुरू किया,”नीमो,बाबा कोए छोटो-मोटो साधू ना सै। वो किसे भी आदमी की किसमत पाँच बरस म्ह एकबै बतावै सै। जो कोए पाँच साल होण तैं पहल्यां उड़े चल्यो जावै तो महाराज उसनै देखते ही न्यू कह देवैंगे-बच्चा इब्बै तेरा बखत रह रह्या सै।”

Language: Hindi
285 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
"नजरों से न गिरना"
Dr. Kishan tandon kranti
मन की आंखें
मन की आंखें
Mahender Singh
सियासत में आकर।
सियासत में आकर।
Taj Mohammad
परिवार होना चाहिए
परिवार होना चाहिए
हिमांशु बडोनी (दयानिधि)
#शेर-
#शेर-
*Author प्रणय प्रभात*
माँ आजा ना - आजा ना आंगन मेरी
माँ आजा ना - आजा ना आंगन मेरी
Basant Bhagawan Roy
🥀 *गुरु चरणों की धूल*🥀
🥀 *गुरु चरणों की धूल*🥀
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
हिन्द के बेटे
हिन्द के बेटे
सुरेन्द्र शर्मा 'शिव'
बढ़ी शय है मुहब्बत
बढ़ी शय है मुहब्बत
shabina. Naaz
हमने देखा है हिमालय को टूटते
हमने देखा है हिमालय को टूटते
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
बदल गया जमाना🌏🙅🌐
बदल गया जमाना🌏🙅🌐
डॉ० रोहित कौशिक
अधखिला फूल निहार रहा है
अधखिला फूल निहार रहा है
VINOD CHAUHAN
भाग दौड़ की जिंदगी में अवकाश नहीं है ,
भाग दौड़ की जिंदगी में अवकाश नहीं है ,
Seema gupta,Alwar
यह उँचे लोगो की महफ़िल हैं ।
यह उँचे लोगो की महफ़िल हैं ।
Ashwini sharma
मंजिल छूते कदम
मंजिल छूते कदम
Arti Bhadauria
जो लिखा है
जो लिखा है
Dr fauzia Naseem shad
ज़िन्दगी में किसी बड़ी उपलब्धि प्राप्त करने के लिए
ज़िन्दगी में किसी बड़ी उपलब्धि प्राप्त करने के लिए
Paras Nath Jha
वो सब खुश नसीब है
वो सब खुश नसीब है
शिव प्रताप लोधी
जीवन सुंदर गात
जीवन सुंदर गात
Kaushlendra Singh Lodhi Kaushal
प्रणय 7
प्रणय 7
Ankita Patel
द्वितीय ब्रह्मचारिणी
द्वितीय ब्रह्मचारिणी
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
2460.पूर्णिका
2460.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
कीमत
कीमत
Ashwani Kumar Jaiswal
हुनर का नर गायब हो तो हुनर खाक हो जाये।
हुनर का नर गायब हो तो हुनर खाक हो जाये।
Vijay kumar Pandey
ॐ
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
जग-मग करते चाँद सितारे ।
जग-मग करते चाँद सितारे ।
Vedha Singh
*आते हैं जग में सदा, जन्म-मृत्यु के मोड़ (कुंडलिया)*
*आते हैं जग में सदा, जन्म-मृत्यु के मोड़ (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
Exhibition
Exhibition
Bikram Kumar
रमेशराज की पेड़ विषयक मुक्तछंद कविताएँ
रमेशराज की पेड़ विषयक मुक्तछंद कविताएँ
कवि रमेशराज
आधार छंद - बिहारी छंद
आधार छंद - बिहारी छंद
भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "
Loading...