Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
6 Feb 2024 · 1 min read

विचार

विचार

एक प्रभावी वक्ता होने के लिए उपयुक्त शब्दों का चयन अति आवश्यक है | एक भी अनुपयुक्त शब्द का चयन , अर्थ को अनर्थ में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है |

अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम “

1 Like · 90 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
View all
You may also like:
👌आत्म गौरव👌
👌आत्म गौरव👌
*Author प्रणय प्रभात*
गमे दर्द नगमे
गमे दर्द नगमे
Monika Yadav (Rachina)
"फिर"
Dr. Kishan tandon kranti
प्रतिध्वनि
प्रतिध्वनि
पूर्वार्थ
🐍भुजंगी छंद🐍 विधान~ [यगण यगण यगण+लघु गुरु] ( 122 122 122 12 11वर्ण,,4 चरण दो-दो चरण समतुकांत]
🐍भुजंगी छंद🐍 विधान~ [यगण यगण यगण+लघु गुरु] ( 122 122 122 12 11वर्ण,,4 चरण दो-दो चरण समतुकांत]
Neelam Sharma
फूल खिले हैं डाली-डाली,
फूल खिले हैं डाली-डाली,
Vedha Singh
* मंजिल आ जाती है पास *
* मंजिल आ जाती है पास *
surenderpal vaidya
ਹਕੀਕਤ ਜਾਣਦੇ ਹਾਂ
ਹਕੀਕਤ ਜਾਣਦੇ ਹਾਂ
Surinder blackpen
अतीत
अतीत
Shyam Sundar Subramanian
झर-झर बरसे नयन हमारे ज्यूँ झर-झर बदरा बरसे रे
झर-झर बरसे नयन हमारे ज्यूँ झर-झर बदरा बरसे रे
हरवंश हृदय
हीर मात्रिक छंद
हीर मात्रिक छंद
Subhash Singhai
हँसते गाते हुए
हँसते गाते हुए
Shweta Soni
मां चंद्रघंटा
मां चंद्रघंटा
Mukesh Kumar Sonkar
कुदरत के रंग....एक सच
कुदरत के रंग....एक सच
Neeraj Agarwal
बचपन में थे सवा शेर
बचपन में थे सवा शेर
VINOD CHAUHAN
जिंदगी को जीने का तरीका न आया।
जिंदगी को जीने का तरीका न आया।
Taj Mohammad
विचार
विचार
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
हार स्वीकार कर
हार स्वीकार कर
रोहताश वर्मा 'मुसाफिर'
बेटा…..
बेटा…..
Dr. Mahesh Kumawat
"आतिशे-इश्क़" ग़ज़ल
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
प्रिये
प्रिये
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
जीवन के दिन चार थे, तीन हुआ बेकार।
जीवन के दिन चार थे, तीन हुआ बेकार।
Manoj Mahato
*राजकली देवी शैक्षिक पुस्तकालय*
*राजकली देवी शैक्षिक पुस्तकालय*
Ravi Prakash
बच्चे पैदा करना बड़ी बात नही है
बच्चे पैदा करना बड़ी बात नही है
Rituraj shivem verma
हंसगति
हंसगति
डॉ.सीमा अग्रवाल
3369⚘ *पूर्णिका* ⚘
3369⚘ *पूर्णिका* ⚘
Dr.Khedu Bharti
जब हम सोचते हैं कि हमने कुछ सार्थक किया है तो हमें खुद पर गर
जब हम सोचते हैं कि हमने कुछ सार्थक किया है तो हमें खुद पर गर
ललकार भारद्वाज
सेंगोल और संसद
सेंगोल और संसद
Damini Narayan Singh
कलियुग की सीता
कलियुग की सीता
Sonam Puneet Dubey
आधा - आधा
आधा - आधा
Shaily
Loading...