Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
13 Jun 2023 · 1 min read

वतन

ये तिरंगा नहीं ये मेरी जान है
हिन्द की आबरू हिन्द की शान है
आन पर जान दे जो अमर हो गए
उन शहीदों पे तनमन ये कुर्बान है।।

जी सको तो जियो इस वतन के लिए
ज़िंदगी को लुटा दो चमन के लिए
काम गर आ गए नाम होगा तेरा
ये तिरंगा मिलेगा कफ़न के लिए।।

तिरंगे से बड़ा कोई नहीं इंसान होता है।
वतन से जो करे खिलवाड़ वो शैतान होता है।
दिलों में जोश भरकर के हिफाज़त हम करें इसकी।
लुटा दे जान जो इसपर वही भगवान होता है।।

Language: Hindi
259 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
“बदलते रिश्ते”
“बदलते रिश्ते”
पंकज कुमार कर्ण
हृद्-कामना....
हृद्-कामना....
डॉ.सीमा अग्रवाल
2313.
2313.
Dr.Khedu Bharti
इंकलाब की मशाल
इंकलाब की मशाल
Shekhar Chandra Mitra
" खामोशी "
Aarti sirsat
दुःख  से
दुःख से
Shweta Soni
"धन्य प्रीत की रीत.."
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
हक़ीक़त ने
हक़ीक़त ने
Dr fauzia Naseem shad
फ़लसफ़ा है जिंदगी का मुस्कुराते जाना।
फ़लसफ़ा है जिंदगी का मुस्कुराते जाना।
Manisha Manjari
फर्श पर हम चलते हैं
फर्श पर हम चलते हैं
Neeraj Agarwal
किसी की गलती देखकर तुम शोर ना करो
किसी की गलती देखकर तुम शोर ना करो
कवि दीपक बवेजा
बदलने को तो इन आंखों ने मंजर ही बदल डाले
बदलने को तो इन आंखों ने मंजर ही बदल डाले
हरवंश हृदय
शिव सबके आराध्य हैं, रावण हो या राम।
शिव सबके आराध्य हैं, रावण हो या राम।
Sanjay ' शून्य'
"स्वर्ग-नरक की खोज"
Dr. Kishan tandon kranti
श्री राम
श्री राम
Kavita Chouhan
“आखिर मैं उदास क्यूँ हूँ?
“आखिर मैं उदास क्यूँ हूँ?
DrLakshman Jha Parimal
गायें गौरव गान
गायें गौरव गान
surenderpal vaidya
विश्व कविता दिवस
विश्व कविता दिवस
विजय कुमार अग्रवाल
रिश्ता ऐसा हो,
रिश्ता ऐसा हो,
लक्ष्मी सिंह
टूटी हुई कलम को
टूटी हुई कलम को
Anil chobisa
*वो बीता हुआ दौर नजर आता है*(जेल से)
*वो बीता हुआ दौर नजर आता है*(जेल से)
Dushyant Kumar
तेरा मेरा साथ
तेरा मेरा साथ
Suman (Aditi Angel 🧚🏻)
हे!जगजीवन,हे जगनायक,
हे!जगजीवन,हे जगनायक,
Neelam Sharma
सृजन के जन्मदिन पर
सृजन के जन्मदिन पर
Satish Srijan
उसी संघर्ष को रोजाना, हम सब दोहराते हैं (हिंदी गजल))
उसी संघर्ष को रोजाना, हम सब दोहराते हैं (हिंदी गजल))
Ravi Prakash
कुशादा
कुशादा
Mamta Rani
पीर
पीर
विनोद वर्मा ‘दुर्गेश’
ग़ज़ल सगीर
ग़ज़ल सगीर
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
🔥आँखें🔥
🔥आँखें🔥
सुरेश अजगल्ले 'इन्द्र '
अधखिला फूल निहार रहा है
अधखिला फूल निहार रहा है
VINOD CHAUHAN
Loading...