लोक-शैली ‘रसिया’ पर आधारित रमेशराज की तेवरी

लोक-शैली ‘रसिया’ पर आधारित रमेशराज की तेवरी
………………………………………………………………….
मीठे सोच हमारे, स्वारथवश कड़वाहट धारे
भइया का दुश्मन अब भइया घर के भीतर है।

इक कमरे में मातम, भूख गरीबी अश्रुपात गम
दूजे कमरे ताता-थइया घर के भीतर है।

नित दहेज के ताने, सास-ननद के राग पुराने
नयी ब्याहता जैसे गइया घर के भीतर है।

नम्र विचार न भाये, सब में अहंकार गुर्राये
हर कोई बन गया ततइया घर के भीतर है।

नये दौर के बच्चे, तुनक मिजाजी-अति नकनच्चे
छटंकी भी अब जैसे ढइया घर के भीतर है।
+रमेशराज

3 Comments · 140 Views
You may also like:
कुछ भी ना साथ रहता है।
Taj Mohammad
गौरैया बोली मुझे बचाओ
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
मेरे दिल का दर्द
Ram Krishan Rastogi
पितृ ऋण
Shyam Sundar Subramanian
नारियल
Buddha Prakash
प्रेमिका.. मेरी प्रेयसी....
Sapna K S
उम्मीद की रोशनी में।
Taj Mohammad
💐💐तुमसे दिल लगाना रास आ गया है💐💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
🌺प्रेम की राह पर-52🌺
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
લંબાવને 'તું' તારો હાથ 'મારા' હાથમાં...
Dr. Alpa H.
मातृ रूप
श्री रमण
श्रीराम गाथा
मनोज कर्ण
तुम ख़्वाबों की बात करते हो।
Taj Mohammad
अजीब कशमकश
Anjana Jain
उबारो हे शंकर !
Shailendra Aseem
कभी भीड़ में…
Rekha Drolia
जिंदगी ये नहीं जिंदगी से वो थी
Abhishek Upadhyay
पृथ्वी दिवस
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
अरविंद सवैया छन्द।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
मैं हूँ किसान।
Anamika Singh
ये नारी है नारी।
Taj Mohammad
“मोह मोह”…….”ॐॐ”….
Piyush Goel
दिल से निकले हुए कुछ मुक्तक
Ram Krishan Rastogi
वो बरगद का पेड़
Shiwanshu Upadhyay
दिल की आरजू.....
Dr. Alpa H.
चेहरा तुम्हारा।
Taj Mohammad
चढ़ता पारा
जगदीश शर्मा सहज
सारे निशां मिटा देते हैं।
Taj Mohammad
श्रम पिता का समाया
शेख़ जाफ़र खान
ग्रीष्म ऋतु भाग ४
Vishnu Prasad 'panchotiya'
Loading...