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2 Feb 2024 · 1 min read

” रे, पंछी पिंजड़ा में पछताए “

हाय रे हाय
कुछ भी समझ न आए,
रे पंछी, पिंजड़ा में पछताए – २

घंटा गिने,पहरिया गिने
सप्ताह,दिन,दुपहरिया गिने
दिनवा गिनत रह जाए – रे पंछी
अंखियां लोर बहाए
रे पंछी………………………..

रतिया काटे, दिनवा काटे
तन्हाई में मनवा डांटे
दुःखवा केहू ना बांटे – रे पंछी
अंखियां लोर बहाए
रे पंछी……………………….

घरवा छूटल, गंऊवां छूटल
माई बाप के छऊवां छूटल
बचवन मेहरि के तड़पाए – रे पंछी
अंखियां लोर बहाए
रे पंछी………………………….

रिश्ता टूटल, नाता टूटल
नेह के बंधन सबसे छूटल
काहें “चुन्नू” के भरमाए – रे पंछी
अंखियां लोर बहाए
रे पंछी………………………….

हाय रे,अब सालों बीता जाए
रे पंछी, पिंजड़ा में पछताए – २

•••• कलमकार ••••
चुन्नू लाल गुप्ता – मऊ (उ.प्र.)

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