Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
17 Jun 2023 · 1 min read

राम नाम अवलंब बिनु, परमारथ की आस।

राम नाम अवलंब बिनु, परमारथ की आस।

बरषत वारिद-बूँद गहि, चाहत चढ़न अकास॥

राम-नाम का आश्रय लिए बिना जो लोग मोक्ष की आशा करते हैं अथवा धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष रूपी चारों परमार्थों को प्राप्त करना चाहते हैं वे मानो बरसते हुए बादलों की बूँदों को पकड़ कर आकाश में चढ़ जाना चाहते हैं। भाव यह है कि जिस प्रकार पानी की बूँदों को पकड़ कर कोई भी आकाश में नहीं चढ़ सकता वैसे ही राम नाम के बिना कोई भी परमार्थ को प्राप्त नहीं कर सकता।

तुलसीदास

2 Likes · 2 Comments · 427 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
खांचे में बंट गए हैं अपराधी
खांचे में बंट गए हैं अपराधी
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
!! जानें कितने !!
!! जानें कितने !!
Chunnu Lal Gupta
■ मुक्तक-
■ मुक्तक-
*Author प्रणय प्रभात*
"अ अनार से"
Dr. Kishan tandon kranti
नमस्ते! रीति भारत की,
नमस्ते! रीति भारत की,
Neelam Sharma
काली मां
काली मां
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
आप और हम जीवन के सच
आप और हम जीवन के सच
Neeraj Agarwal
एक सही आदमी ही अपनी
एक सही आदमी ही अपनी
Ranjeet kumar patre
बुंदेलखंड के आधुनिक कवि पुस्तक कलेक्टर महोदय को भेंट की
बुंदेलखंड के आधुनिक कवि पुस्तक कलेक्टर महोदय को भेंट की
राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
राशिफल
राशिफल
Dr. Pradeep Kumar Sharma
"अमर रहे गणतंत्र" (26 जनवरी 2024 पर विशेष)
Dr. Asha Kumar Rastogi M.D.(Medicine),DTCD
जय श्रीकृष्ण । ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ।
जय श्रीकृष्ण । ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ।
Raju Gajbhiye
23/118.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
23/118.*छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
बीड़ी की बास
बीड़ी की बास
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
Learn to recognize a false alarm
Learn to recognize a false alarm
पूर्वार्थ
ब्रज के एक सशक्त हस्ताक्षर लोककवि रामचरन गुप्त +प्रोफेसर अशोक द्विवेदी
ब्रज के एक सशक्त हस्ताक्षर लोककवि रामचरन गुप्त +प्रोफेसर अशोक द्विवेदी
कवि रमेशराज
तूझे क़ैद कर रखूं मेरा ऐसा चाहत नहीं है
तूझे क़ैद कर रखूं मेरा ऐसा चाहत नहीं है
Keshav kishor Kumar
माँ कहने के बाद भला अब, किस समर्थ कुछ देने को,
माँ कहने के बाद भला अब, किस समर्थ कुछ देने को,
pravin sharma
जल से सीखें
जल से सीखें
Saraswati Bajpai
अमूक दोस्त ।
अमूक दोस्त ।
SATPAL CHAUHAN
चंद अशआर -ग़ज़ल
चंद अशआर -ग़ज़ल
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
माथे की बिंदिया
माथे की बिंदिया
Pankaj Bindas
तू इश्क, तू खूदा
तू इश्क, तू खूदा
लक्ष्मी सिंह
मेरी पेशानी पे तुम्हारा अक्स देखकर लोग,
मेरी पेशानी पे तुम्हारा अक्स देखकर लोग,
Shreedhar
अपना बिहार
अपना बिहार
AMRESH KUMAR VERMA
ज़िंदगी का सवाल रहता है
ज़िंदगी का सवाल रहता है
Dr fauzia Naseem shad
जो मासूम हैं मासूमियत से छल रहें हैं ।
जो मासूम हैं मासूमियत से छल रहें हैं ।
सत्येन्द्र पटेल ‘प्रखर’
दादी की वह बोरसी
दादी की वह बोरसी
Dr. Ramesh Kumar Nirmesh
क्यों नारी लूट रही है
क्यों नारी लूट रही है
gurudeenverma198
कुटिल  (कुंडलिया)
कुटिल (कुंडलिया)
Ravi Prakash
Loading...