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11 Jan 2023 · 1 min read

*राजा जन-सामान्य (कुंडलिया)*

राजा जन-सामान्य (कुंडलिया)
_________________________
होटल राजमहल हुए, महाराज सब आम
राज-रियासत हो गया, अब अतीत का नाम
अब अतीत का नाम, समय का पहिया घूमा
राजा जन-सामान्य, प्रजा ने नभ को चूमा
कहते रवि कविराय, भाग्य-परिवर्तन हर पल
कभी राज-दरबार, आज दिखते हैं होटल
—————————————-
रचयिता : रवि प्रकाश
बाजार सर्राफा, रामपुर, उत्तर प्रदेश
मोबाइल 99976 15451

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