Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
13 Oct 2016 · 1 min read

राजयोग महागीता:: गुरुक्तानुभव ( घनाक्षरी: ४)पोस्ट९पोस्ट९

क्रोध क्या यह क्रूरता , कठोरता , कुटिलता ,
त्याज्य है असंतोष , त्याग विष के समान ।
नृप! करुणा क्या आर्जव , मित्रता ,सरलता ,
तू न पृथ्वी , सलिल है , न ही वायु ,अग्नि, व्योम,
निज को इन सबको साक्षी, चैतन्य जान ।
तू निश्चय ही ज्ञानी है , सुपात्र नृपेंद्र सत्य ,
चाहता है जानना – वीतरीगता का ज्ञान ।।अध्याय:१/ ४
—— जितेंद्रकमलआनंद

Language: Hindi
186 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
'डोरिस लेसिगं' (घर से नोबेल तक)
'डोरिस लेसिगं' (घर से नोबेल तक)
Indu Singh
बंदूक के ट्रिगर पर नियंत्रण रखने से पहले अपने मस्तिष्क पर नि
बंदूक के ट्रिगर पर नियंत्रण रखने से पहले अपने मस्तिष्क पर नि
Rj Anand Prajapati
हिंदी की भविष्यत्काल की मुख्य क्रिया में हमेशा ऊँगा /ऊँगी (य
हिंदी की भविष्यत्काल की मुख्य क्रिया में हमेशा ऊँगा /ऊँगी (य
कुमार अविनाश 'केसर'
बाल कविता: मुन्ने का खिलौना
बाल कविता: मुन्ने का खिलौना
Rajesh Kumar Arjun
मैं भारत का जन गण
मैं भारत का जन गण
Kaushal Kishor Bhatt
2843.*पूर्णिका*
2843.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
बिना आमन्त्रण के
बिना आमन्त्रण के
gurudeenverma198
वहाँ से पानी की एक बूँद भी न निकली,
वहाँ से पानी की एक बूँद भी न निकली,
शेखर सिंह
हम उन्हें कितना भी मनाले
हम उन्हें कितना भी मनाले
The_dk_poetry
ना फूल मेरी क़ब्र पे
ना फूल मेरी क़ब्र पे
Shweta Soni
आइये झांकते हैं कुछ अतीत में
आइये झांकते हैं कुछ अतीत में
Atul "Krishn"
बुद्धिमान हर बात पर, पूछें कई सवाल
बुद्धिमान हर बात पर, पूछें कई सवाल
महावीर उत्तरांचली • Mahavir Uttranchali
भारत के राम
भारत के राम
करन ''केसरा''
श्री राम जी अलौकिक रूप
श्री राम जी अलौकिक रूप
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
*तुम और  मै धूप - छाँव  जैसे*
*तुम और मै धूप - छाँव जैसे*
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
ईश्वर
ईश्वर
Neeraj Agarwal
पायल
पायल
Dinesh Kumar Gangwar
आपस की गलतफहमियों को काटते चलो।
आपस की गलतफहमियों को काटते चलो।
Prabhu Nath Chaturvedi "कश्यप"
* मुझे क्या ? *
* मुझे क्या ? *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
आओ जाओ मेरी बाहों में,कुछ लम्हों के लिए
आओ जाओ मेरी बाहों में,कुछ लम्हों के लिए
Ram Krishan Rastogi
Yaade tumhari satane lagi h
Yaade tumhari satane lagi h
Kumar lalit
हिन्दी की मिठास, हिन्दी की बात,
हिन्दी की मिठास, हिन्दी की बात,
Swara Kumari arya
क्या रखा है???
क्या रखा है???
Sûrëkhâ
"दरअसल"
Dr. Kishan tandon kranti
पर्दा हटते ही रोशनी में आ जाए कोई
पर्दा हटते ही रोशनी में आ जाए कोई
कवि दीपक बवेजा
कश्मीरी पण्डितों की रक्षा में कुर्बान हुए गुरु तेगबहादुर
कश्मीरी पण्डितों की रक्षा में कुर्बान हुए गुरु तेगबहादुर
कवि रमेशराज
सुबह सुहानी आ रही, खूब खिलेंगे फूल।
सुबह सुहानी आ रही, खूब खिलेंगे फूल।
surenderpal vaidya
बोलना , सुनना और समझना । इन तीनों के प्रभाव से व्यक्तित्व मे
बोलना , सुनना और समझना । इन तीनों के प्रभाव से व्यक्तित्व मे
Raju Gajbhiye
दुम
दुम
Rajesh
बेवजह कभी कुछ  नहीं होता,
बेवजह कभी कुछ नहीं होता,
लक्ष्मी वर्मा प्रतीक्षा
Loading...