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योजना है

सुनो एक योजना है।

  जब तलक पूरी न होगी,
  इस जहाँ में जिद हमारी।
  जुबाँ पर फरियाद होगी,
  अवज्ञाएँ फिर हमारी।
  जब तलक ना वक्त साथी,
  दुख तो यूँ ही भोगना है।
  सुनो……….

                                 लालसा कुछ छोड़ दें, 
                                 संशय की गागर फोड़ दें।
                                ओज मन में संचरित कर,
                                भ्रमित मन झकझोर दें।
                               दो कदम हर रोज़ चलकर,
                               लक्ष्य को ही सोचना है।
                               सुनो……….

  इन खगों से सीख लें,
  गगन में उनमुक्त उड़ना।
  तिनका-तिनका जोड़कर,
  नीड़ सा सपनों को बुनना।
  अब नहीं रुकेंगे थककर,
  अब यही परियोजना है।
  सुनो………….

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