Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
12 Mar 2017 · 1 min read

“ये मायूसी”

मेरे चेहरे की मायूसी,
हरदम यही बताती है।
जब भी तन्हा होता हूँ मैं,
याद तेरी सताती है।
हल्की हवाए चलती है जो,
मेरे कानो को कुछ कह जाती है।
हर वक़्त गुज़र जाता है लेकिन,
तेरी याद दिलो मे रह जाती है।
अकेला चलना तो राहो पर,
बडा ही मुश्किल लगता,
फिरभी मंज़िल को पाकर के,
कुछ खोया-खोया सा लगता है।
मुझे बुलन्दी मिलकर भी,
कुछ ऐसा-वैसा लगता!
अब तो मुझको अर्ष भी यारों,
फर्श के जैसा लगता है!
अब तो मेरी खुशिया भी,
मुझको ग़म के जैसी लगती है!
बस तेरी मुस्कान ही मुझको,
मरहम के जैसी लगती है!
मेरे चेहरे की मायूसी,
हरदम यही बताती है।
जब भी तन्हा होता हु मैं,
याद तेरी सताती है।

(((((ज़ैद बलियावीं))))

1 Like · 529 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
“मत लड़, ऐ मुसाफिर”
“मत लड़, ऐ मुसाफिर”
पंकज कुमार कर्ण
अब न वो आहें बची हैं ।
अब न वो आहें बची हैं ।
Arvind trivedi
तेरी वापसी के सवाल पर, ख़ामोशी भी खामोश हो जाती है।
तेरी वापसी के सवाल पर, ख़ामोशी भी खामोश हो जाती है।
Manisha Manjari
फितरत
फितरत
Anujeet Iqbal
*आशाओं के दीप*
*आशाओं के दीप*
Harminder Kaur
मैं तो महज इत्तिफ़ाक़ हूँ
मैं तो महज इत्तिफ़ाक़ हूँ
VINOD CHAUHAN
गुस्सा
गुस्सा
Sûrëkhâ
2776. *पूर्णिका*
2776. *पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
💐प्रेम कौतुक-541💐
💐प्रेम कौतुक-541💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
आफत की बारिश
आफत की बारिश
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
*माना के आज मुश्किल है पर वक्त ही तो है,,
*माना के आज मुश्किल है पर वक्त ही तो है,,
Vicky Purohit
मंजिल यू‌ँ ही नहीं मिल जाती,
मंजिल यू‌ँ ही नहीं मिल जाती,
Yogendra Chaturwedi
दीवाली
दीवाली
Nitu Sah
दर्द अपना संवार
दर्द अपना संवार
Dr fauzia Naseem shad
सामाजिक कविता: पाना क्या?
सामाजिक कविता: पाना क्या?
Rajesh Kumar Arjun
सोचा होगा
सोचा होगा
संजय कुमार संजू
।। कसौटि ।।
।। कसौटि ।।
विनोद कृष्ण सक्सेना, पटवारी
बदरा बरसे
बदरा बरसे
Dr. Kishan tandon kranti
#एक_और_बरसी
#एक_और_बरसी
*Author प्रणय प्रभात*
तितली
तितली
Manu Vashistha
जीवन मंत्र वृक्षों के तंत्र होते हैं
जीवन मंत्र वृक्षों के तंत्र होते हैं
Neeraj Agarwal
मिटता नहीं है अंतर मरने के बाद भी,
मिटता नहीं है अंतर मरने के बाद भी,
Sanjay ' शून्य'
संवरना हमें भी आता है मगर,
संवरना हमें भी आता है मगर,
ओसमणी साहू 'ओश'
उत्थान राष्ट्र का
उत्थान राष्ट्र का
इंजी. संजय श्रीवास्तव
* चली रे चली *
* चली रे चली *
DR ARUN KUMAR SHASTRI
हर एक नागरिक को अपना, सर्वश्रेष्ठ देना होगा
हर एक नागरिक को अपना, सर्वश्रेष्ठ देना होगा
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
रमेशराज के साम्प्रदायिक सद्भाव के गीत
रमेशराज के साम्प्रदायिक सद्भाव के गीत
कवि रमेशराज
हमेशा के लिए कुछ भी नहीं है
हमेशा के लिए कुछ भी नहीं है
Adha Deshwal
असली दर्द का एहसास तब होता है जब अपनी हड्डियों में दर्द होता
असली दर्द का एहसास तब होता है जब अपनी हड्डियों में दर्द होता
प्रेमदास वसु सुरेखा
पापा गये कहाँ तुम ?
पापा गये कहाँ तुम ?
Surya Barman
Loading...