Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 Feb 2024 · 1 min read

ये नयी सभ्यता हमारी है

ये नयी सभ्यता हमारी है
आदमी का मशीन हो जाना।

61 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from Shweta Soni
View all
You may also like:
मुझे अच्छी नहीं लगती
मुझे अच्छी नहीं लगती
Dr fauzia Naseem shad
भाव तब होता प्रखर है
भाव तब होता प्रखर है
Dr. Meenakshi Sharma
सुखी को खोजन में जग गुमया, इस जग मे अनिल सुखी मिला नहीं पाये
सुखी को खोजन में जग गुमया, इस जग मे अनिल सुखी मिला नहीं पाये
Anil chobisa
ई-संपादक
ई-संपादक
Dr. Pradeep Kumar Sharma
"तिलचट्टा"
Dr. Kishan tandon kranti
एक काफ़िर की दुआ
एक काफ़िर की दुआ
Shekhar Chandra Mitra
श्रेष्ठ भावना
श्रेष्ठ भावना
Raju Gajbhiye
"प्यार में तेरे "
Pushpraj Anant
सिखों का बैसाखी पर्व
सिखों का बैसाखी पर्व
कवि रमेशराज
ग़ज़ल
ग़ज़ल
ईश्वर दयाल गोस्वामी
तेरी याद
तेरी याद
SURYA PRAKASH SHARMA
मेरे मुक्तक
मेरे मुक्तक
निरंजन कुमार तिलक 'अंकुर'
बहुत मुश्किल है दिल से, तुम्हें तो भूल पाना
बहुत मुश्किल है दिल से, तुम्हें तो भूल पाना
gurudeenverma198
मेरी सोच~
मेरी सोच~
दिनेश एल० "जैहिंद"
परिवार का एक मेंबर कांग्रेस में रहता है
परिवार का एक मेंबर कांग्रेस में रहता है
शेखर सिंह
पूस की रात।
पूस की रात।
Anil Mishra Prahari
*खिलना सीखो हर समय, जैसे खिले गुलाब (कुंडलिया)*
*खिलना सीखो हर समय, जैसे खिले गुलाब (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
क़ैद कर लीं हैं क्यों साँसे ख़ुद की 'नीलम'
क़ैद कर लीं हैं क्यों साँसे ख़ुद की 'नीलम'
Neelam Sharma
** समय कीमती **
** समय कीमती **
surenderpal vaidya
नागपंचमी........एक पर्व
नागपंचमी........एक पर्व
Neeraj Agarwal
चील .....
चील .....
sushil sarna
यह नफरत बुरी है ना पालो इसे
यह नफरत बुरी है ना पालो इसे
VINOD CHAUHAN
हकीकत जानते हैं
हकीकत जानते हैं
Surinder blackpen
आस्था
आस्था
DR ARUN KUMAR SHASTRI
कभी कभी प्रतीक्षा
कभी कभी प्रतीक्षा
पूर्वार्थ
मन में संदिग्ध हो
मन में संदिग्ध हो
Rituraj shivem verma
बेज़ुबान जीवों पर
बेज़ुबान जीवों पर
*Author प्रणय प्रभात*
अपनी हीं क़ैद में हूँ
अपनी हीं क़ैद में हूँ
Shweta Soni
रिश्ते चाय की तरह छूट रहे हैं
रिश्ते चाय की तरह छूट रहे हैं
Harminder Kaur
उनका ही बोलबाला है
उनका ही बोलबाला है
मानक लाल मनु
Loading...