Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
19 Oct 2023 · 2 min read

या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै

या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कंदमाता रूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमतस्यै नमो नमः।।

( अर्थात हे माँ! सर्वत्र विराजमान और स्कंदमाता के रूप में प्रसिद्ध अंबे आपको मेरा बार-बार प्रणाम है।)

नवरात्रि के पांचवें दिन माँ दुर्गा के पंचम स्वरूप में माँ स्कंदमाता की आराधना की जाती है। स्कंद का अर्थ -भगवान कार्तिकेय और माता का अर्थ- माँ है, अतः इनके नाम का अर्थ ही स्कंदमाता है।
इनकी माँ देवी दुर्गा थी और इसी वजह से माँ दुर्गा के स्वरूप को स्कंदमाता भी कहा जाता है। स्कंदमाता हिमालय की पुत्री पार्वती ही है, इन्हें गौरी भी कहा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार तारकासुर नाम का एक राक्षस था जिसका आतंक बहुत बढ़ गया था। लेकिन तारकासुर का कोई अंत नहीं कर सकता था। भगवान शिव के पुत्र स्कंध के हाथों ही उसका अंत संभव था। ऐसे में माँ पार्वती ने अपने पुत्र स्कंद यानी कार्तिकेय के को युद्ध के लिए प्रशिक्षित करने के लिए स्कंदमाता का रूप धारण किया। मोक्ष के द्वार खोलने वाली माता परम सुखदाई हैं माँ अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती हैं साधक का मन समस्त लौकिक सांसारिक मायाविक बंधनों से विमुक्त होकर पद्मासना माँ स्कंद माता के स्वरूप में पूर्णतः तल्लीन होता है। निसंतान दंपतियों को यह व्रत रखना चाहिए क्योंकि इससे न केवल सौभाग्य की प्राप्ति होती है बल्कि आपको संतान सुख भी मिलता है। मां स्कंदमाता को सफेद रंग बहुत प्रिय है मान्यता है कि सफेद रंग पहनकर मां को केले का भोग लगाने से निरोगी रहने का आशीर्वाद मिलता है। तथा जीवन में शांति, पवित्रता, ध्यान और सकारात्मक को फैलाता है। माँ स्कंदमाता को प्रसन्न करने के लिए हरे रंग के वस्त्र पहनना चाहिए इससे देवी प्रसन्न होती है और सड़क का जीवन ऊर्जा से भर जाता है केले का भोग लगाने के बाद यह ब्राह्मण को दे देना चाहिए ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है। इसमें आवाहन ,आसन ,पाद्म ,अर्ध्य, आचमन ,स्नान, वस्त्र सौभाग्य सूत्र ,चंदन ,रोली, हल्दी ,धूप ,दीप नैवेद्य, फल,पान ,दक्षिण ,आरती , मंत्र ,पुष्पांजलि आदि करें प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।

हरमिंदर कौर
अमरोहा(यूपी)

1 Like · 118 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
अपने ही  में उलझती जा रही हूँ,
अपने ही में उलझती जा रही हूँ,
Davina Amar Thakral
नियम पुराना
नियम पुराना
हिमांशु बडोनी (दयानिधि)
लोग दुर चले जाते पर,
लोग दुर चले जाते पर,
Radha jha
देखकर प्यारा सवेरा
देखकर प्यारा सवेरा
surenderpal vaidya
"फसाद की जड़"
Dr. Kishan tandon kranti
डाल-डाल तुम हो कर आओ
डाल-डाल तुम हो कर आओ
नंदलाल सिंह 'कांतिपति'
*मन की पीड़ा मत कहो, जाकर हर घर-द्वार (कुंडलिया)*
*मन की पीड़ा मत कहो, जाकर हर घर-द्वार (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
यही जीवन है ।
यही जीवन है ।
Rohit yadav
$ग़ज़ल
$ग़ज़ल
आर.एस. 'प्रीतम'
जोड़ तोड़ सीखा नही ,सीखा नही विलाप।
जोड़ तोड़ सीखा नही ,सीखा नही विलाप।
manisha
हम गांव वाले है जनाब...
हम गांव वाले है जनाब...
AMRESH KUMAR VERMA
Speak with your work not with your words
Speak with your work not with your words
Nupur Pathak
मेरे हमसफ़र
मेरे हमसफ़र
Sonam Puneet Dubey
*** शुक्रगुजार हूँ ***
*** शुक्रगुजार हूँ ***
Chunnu Lal Gupta
जज्बात
जज्बात
अखिलेश 'अखिल'
उम्र के हर पड़ाव पर
उम्र के हर पड़ाव पर
Surinder blackpen
निगाहें
निगाहें
Shyam Sundar Subramanian
हमे अब कहा फिक्र जमाने की है
हमे अब कहा फिक्र जमाने की है
पूर्वार्थ
एक तरफ
एक तरफ
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
जनमदिन तुम्हारा !!
जनमदिन तुम्हारा !!
Dhriti Mishra
हर दिन माँ के लिए
हर दिन माँ के लिए
Sandhya Chaturvedi(काव्यसंध्या)
Life through the window during lockdown
Life through the window during lockdown
ASHISH KUMAR SINGH
*अहंकार*
*अहंकार*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
Thought
Thought
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
मां
मां
Monika Verma
काश
काश
लक्ष्मी सिंह
अनन्त तक चलना होगा...!!!!
अनन्त तक चलना होगा...!!!!
Jyoti Khari
एक तेरे चले जाने से कितनी
एक तेरे चले जाने से कितनी
ब्रजनंदन कुमार 'विमल'
ये जो मेरी आँखों में
ये जो मेरी आँखों में
हिमांशु Kulshrestha
■ ये डाल-डाल, वो पात-पात। सब पंछी इक डाल के।।
■ ये डाल-डाल, वो पात-पात। सब पंछी इक डाल के।।
*Author प्रणय प्रभात*
Loading...