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9 Aug 2023 · 1 min read

यकीन नहीं होता

यकीन नहीं होता

बादल से खून बरसता है
चिराग नहीं घर जलता है
जहर हर दिल में बसता है
कफन बांध इंसान चलता है
मोहब्बत में धोखा मिलता है
इतना जो रंग बदलता है
गिरगिट का मामा लगता है
गमले में लगा बरगद से भिड़ता है
बाजार जिंस नहीं जमीर का लगता है
सूरज से सियासी रंग निकलता है
वतन की अस्मिता है जो लुटता है
आदमी आदमी का शिकार करता है

डा राजीव “सागर”

1 Like · 274 Views
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