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8 Jan 2024 · 1 min read

मौसम का क्या मिजाज है मत पूछिए जनाब।

मौसम का क्या मिजाज है मत पूछिए जनाब।
ठंडक से छुप गया है कहीं जाके आफताब।
🌷
कंबल रजाई ओढ़ के लेटे हैं अभी तक।
दुबके पड़े है बचपना पीरी हो या शबाब।
💐
दिखता नहीं है सामने कुछ सूझता नहीं।
कोहरा बरस रहा है सड़क पर भी बेहिसाब।
💐
ठंडी बचा न पाएगा अब कोई अलाव।
सिंक सिंक के हुए जा रहे हैं अब सभी कबाब।
💐
अब हाथ पैर सुन्न हैं,और कंपकपाते होंट।
कैसे पढ़े भी कोई मुहब्बत की अब किताब।
💐
बर्ग,गुल,शाख, शजर लगते बर्फ से।
बेला,गुलाब,चंपा चमेली हो या गुलाब।
💐
सर्दी का है असर की अजी नाक बह रही।
मुंह को छुपा लो यार लगा लो कोई हिजाब।
💐
कैसे लिखें ग़ज़ल कोई या शेरो शायरी।
सिकुड़ी हुई क़लम भी है,ठिठरी है माहताब।
💐
कितनी नसीहतें मिली कितनी फजी़हतें।
लेटे लिहाफ ओढ़ “सगी़र” नेकी और सवाब।

Language: Hindi
119 Views
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