Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
14 Nov 2023 · 1 min read

मोहब्बत से जिए जाना ज़रूरी है ज़माने में

मोहब्बत से जिए जाना ज़रूरी है ज़माने में
ख़ुद अपने हाथ जल जाते हैं औरों को जलाने में

Johnny Ahmed क़ैस

1 Like · 175 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
मां नही भूलती
मां नही भूलती
Anjana banda
जीवन
जीवन
Bodhisatva kastooriya
विचारों का शून्य होना ही शांत होने का आसान तरीका है
विचारों का शून्य होना ही शांत होने का आसान तरीका है
डॉ. शशांक शर्मा "रईस"
मुक्तक-
मुक्तक-
डाॅ. बिपिन पाण्डेय
"आदमी की तलाश"
Dr. Kishan tandon kranti
2580.पूर्णिका
2580.पूर्णिका
Dr.Khedu Bharti
आधुनिक युग और नशा
आधुनिक युग और नशा
नंदलाल मणि त्रिपाठी पीताम्बर
सितारों को आगे बढ़ना पड़ेगा,
सितारों को आगे बढ़ना पड़ेगा,
Slok maurya "umang"
.        ‼️🌹जय श्री कृष्ण🌹‼️
. ‼️🌹जय श्री कृष्ण🌹‼️
जूनियर झनक कैलाश अज्ञानी झाँसी
जहाँ जिंदगी को सुकून मिले
जहाँ जिंदगी को सुकून मिले
Ranjeet kumar patre
*अहमब्रह्मास्मि9*
*अहमब्रह्मास्मि9*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
रूठे लफ़्ज़
रूठे लफ़्ज़
Alok Saxena
सावन मास निराला
सावन मास निराला
सुरेश कुमार चतुर्वेदी
लगाये तुमको हम यह भोग,कुंवर वीर तेजाजी
लगाये तुमको हम यह भोग,कुंवर वीर तेजाजी
gurudeenverma198
मेरी चाहत रही..
मेरी चाहत रही..
हिमांशु Kulshrestha
ਯਾਦਾਂ ਤੇ ਧੁਖਦੀਆਂ ਨੇ
ਯਾਦਾਂ ਤੇ ਧੁਖਦੀਆਂ ਨੇ
Surinder blackpen
वफ़ाओं का सिला कोई नहीं
वफ़ाओं का सिला कोई नहीं
अरशद रसूल बदायूंनी
चाय कलियुग का वह अमृत है जिसके साथ बड़ी बड़ी चर्चाएं होकर बड
चाय कलियुग का वह अमृत है जिसके साथ बड़ी बड़ी चर्चाएं होकर बड
ओम प्रकाश श्रीवास्तव
बेशर्मी
बेशर्मी
Sanjay ' शून्य'
ఓ యువత మేలుకో..
ఓ యువత మేలుకో..
डॉ गुंडाल विजय कुमार 'विजय'
रमेशराज के बालमन पर आधारित बालगीत
रमेशराज के बालमन पर आधारित बालगीत
कवि रमेशराज
मेरी बच्ची - दीपक नीलपदम्
मेरी बच्ची - दीपक नीलपदम्
नील पदम् Deepak Kumar Srivastava (दीपक )(Neel Padam)
Stop use of Polythene-plastic
Stop use of Polythene-plastic
Tushar Jagawat
इंडिया दिल में बैठ चुका है दूर नहीं कर पाओगे।
इंडिया दिल में बैठ चुका है दूर नहीं कर पाओगे।
सत्य कुमार प्रेमी
आहाँ अपन किछु कहैत रहू ,आहाँ अपन किछु लिखइत रहू !
आहाँ अपन किछु कहैत रहू ,आहाँ अपन किछु लिखइत रहू !
DrLakshman Jha Parimal
Speak with your work not with your words
Speak with your work not with your words
Nupur Pathak
मैं सुर हूॅ॑ किसी गीत का पर साज तुम्ही हो
मैं सुर हूॅ॑ किसी गीत का पर साज तुम्ही हो
VINOD CHAUHAN
कुछ करो ऐसा के अब प्यार सम्भाला जाये
कुछ करो ऐसा के अब प्यार सम्भाला जाये
shabina. Naaz
अंधे रेवड़ी बांटने में लगे
अंधे रेवड़ी बांटने में लगे
Umesh उमेश शुक्ल Shukla
■ ये हैं ठेकेदार
■ ये हैं ठेकेदार
*Author प्रणय प्रभात*
Loading...