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6 May 2023 · 1 min read

मेरी बेटियाँ और उनके आँसू

ए हवा, ठहर जा तू मेरी बेटियों के आँसुओं की धारा लेकर आई है,
मेरी कोख ने जिसे जन्म दिया उनकी हसरतों को दफना कर आई है I

तेरे राह में कितने कांटे आये पर तूने हिम्मत नहीं हारी ?
अपने मुकाम को हासिल करना जीवन की चुनौती मानी ,
भारत का मस्तक जहाँ में ऊँचा करके तूने दीवाली जानी ,
गौरव देने वाली कली आज हवा के रूख से क्यों घबराई ?

ए हवा, ठहर जा तू मेरी बेटियों के आँसुओं की धारा लेकर आई है,
मेरी कोख ने जिसे जन्म दिया उनकी हसरतों को दफना कर आई है I

परदेशी, जरा डर हवा की रफ़्तार से वो कहीं तूफ़ान न बन जाये ,
हवा के सैलाब में जहाजों का महल तिनके की तरह न बह जाये,
तेरा सोने का आशियाना कहीं समंदर की लहरों में न गुम हो जाये ,
ए इंसान , तेरा जलता चिराग कहीं हवा के झोंकों से बुझ न जाये ?

ए हवा, ठहर जा तू मेरी बेटियों के आँसुओं की धारा लेकर आई है,
मेरी कोख ने जिसे जन्म दिया उनकी हसरतों को दफना कर आई है I

माली को खामोश देखकर कलियाँ गुलशन में विलाप कर रही ,
फुलवारी की बची हुई कलियाँ अपनी बारी का इंतज़ार कर रही ,
“राज” कलियों के आंसू मोती बनकर वक़्त की तरफ देख रही ,
जहाँ के मालिक, तुझसे तेरी बेटियाँ इन्साफ की गुहार कर रही I
****************************************************
मेरा यह गीत मेरी लाखों बहन – बेटियों को समर्पित है, जो संघर्ष में जूझते हुए अपना लक्ष्य प्राप्त करती है I

देशराज “ राज ”
कानपुर

Language: Hindi
Tag: गीत
2 Likes · 1 Comment · 511 Views
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