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10 Nov 2016 · 1 min read

में उसे अपना बनाने में लगा रेहता हूँ..

गुजरे लम्हों को भूलाने में लगा रेहता हूँ,
में उसे अपना बनाने में लगा रेहता हूँ..

ख्वाहिशें है कई,अधूरी न रेह जाय कोई,
करके ये ख्याल कमाने में लगा रहता हूँ
में उसे अपना बनाने में लगा रेहता हूँ ।

करते हैं उजागर वो सरेआम गमो को अपने,
और में अपना दर्द छुपाने में लगा रेहता हूँ।
में उसे अपना बनाने में लगा रेहता हूँ ।

गिरा हूँ इश्क़ में खुद मुँह के बल दोस्तों,
पर इश्क़ के अपाहिजों को चलाने में लगा रेहता हूँ।
में उसे अपना बनाने में लगा रेहता हूँ ।

नादाँ रोती है हर छोटी बातों को लेकर
में छोड़ के हर काम हँसाने में लगा रेहता हूँ।
में उसे अपना बनाने में लगा रेहता हूँ ।

कपिल जैन

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