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28 Dec 2017 · 1 min read

“मुक्तक”

“मुक्तक”

पन्नों में खो गई अकेली, हाथन लगी किताब सहेली
निकलूँ कैसे बाहर बतला, छोड़ न पाती तुझे नवेली
दरवाजा तो खोला तुमने, जाने पर मुँह मोड़ा तुमने
निकली थी देखन चौराहा, छोड़ तुझे हो गई अकेली॥

महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी

Language: Hindi
471 Views
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