Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
16 Jun 2016 · 1 min read

रोक लो प्रदूषण

एक टुकड़ा बादल ,क्या प्यास बुझा देगा
कटें जंगल रहो प्यासे रब सजा देगा
अब रोक लो प्रदूषण बढ़ाओ हरियाली
नहीं तो नीर इक दिन तुम को दगा देगा।

Language: Hindi
413 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
You may also like:
तिमिर घनेरा बिछा चतुर्दिक्रं,चमात्र इंजोर नहीं है
तिमिर घनेरा बिछा चतुर्दिक्रं,चमात्र इंजोर नहीं है
पूर्वार्थ
जीवन बेहतर बनाए
जीवन बेहतर बनाए
डॉ विजय कुमार कन्नौजे
बुझी राख
बुझी राख
Vindhya Prakash Mishra
सहित्य में हमे गहरी रुचि है।
सहित्य में हमे गहरी रुचि है।
Ekta chitrangini
2898.*पूर्णिका*
2898.*पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
जब सब्र आ जाये तो....
जब सब्र आ जाये तो....
shabina. Naaz
सुबह-सुबह की लालिमा
सुबह-सुबह की लालिमा
Neeraj Agarwal
■ कमाल है साहब!!
■ कमाल है साहब!!
*Author प्रणय प्रभात*
चंद्रशेखर आज़ाद जी की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि
चंद्रशेखर आज़ाद जी की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि
Dr Archana Gupta
कहा तुमने कभी देखो प्रेम  तुमसे ही है जाना
कहा तुमने कभी देखो प्रेम तुमसे ही है जाना
Ranjana Verma
कदम बढ़े  मदिरा पीने  को मदिरालय द्वार खड़काया
कदम बढ़े मदिरा पीने को मदिरालय द्वार खड़काया
सुखविंद्र सिंह मनसीरत
कब तक यही कहे
कब तक यही कहे
मानक लाल मनु
वक़्त का आईना
वक़्त का आईना
Shekhar Chandra Mitra
बैठी रहो कुछ देर और
बैठी रहो कुछ देर और
gurudeenverma198
बाल्यकाल (मैथिली भाषा)
बाल्यकाल (मैथिली भाषा)
Dinesh Yadav (दिनेश यादव)
सुनले पुकार मैया
सुनले पुकार मैया
Basant Bhagawan Roy
#यदा_कदा_संवाद_मधुर, #छल_का_परिचायक।
#यदा_कदा_संवाद_मधुर, #छल_का_परिचायक।
संजीव शुक्ल 'सचिन'
"अन्दर ही अन्दर"
Dr. Kishan tandon kranti
रख लेना तुम सम्भाल कर
रख लेना तुम सम्भाल कर
Pramila sultan
मौका जिस को भी मिले वही दिखाए रंग ।
मौका जिस को भी मिले वही दिखाए रंग ।
Mahendra Narayan
उम्मीद से अधिक मिलना भी आदमी में घमंड का भाव पैदा करता है !
उम्मीद से अधिक मिलना भी आदमी में घमंड का भाव पैदा करता है !
Babli Jha
देना और पाना
देना और पाना
Sandeep Pande
फालतू की शान औ'र रुतबे में तू पागल न हो।
फालतू की शान औ'र रुतबे में तू पागल न हो।
सत्य कुमार प्रेमी
ग़ज़ल
ग़ज़ल
प्रीतम श्रावस्तवी
*प्रेमचंद (पॉंच दोहे)*
*प्रेमचंद (पॉंच दोहे)*
Ravi Prakash
बाढ़
बाढ़
Dr.Pratibha Prakash
तुम्हारी छवि...
तुम्हारी छवि...
उमर त्रिपाठी
💐प्रेम कौतुक-322💐
💐प्रेम कौतुक-322💐
शिवाभिषेक: 'आनन्द'(अभिषेक पाराशर)
संघर्ष हमारा जीतेगा,
संघर्ष हमारा जीतेगा,
Shweta Soni
*****सूरज न निकला*****
*****सूरज न निकला*****
Kavita Chouhan
Loading...