Sahityapedia
Login Create Account
Home
Search
Dashboard
Notifications
Settings
26 Mar 2019 · 1 min read

मुक्तक

ख़ुद पुकारेगी जो मंज़िल तो ठहर जाऊँगी
वरना ख़ुद्दार मुसाफ़िर हूँ गुज़र जाऊँगी,
आँधियों का मुझे क्या ख़ौफ़ मैं पत्थर हूँ
रेत का ढेर नहीं हूँ जो बिखर जाऊँगी

Language: Hindi
210 Views
📢 Stay Updated with Sahityapedia!
Join our official announcements group on WhatsApp to receive all the major updates from Sahityapedia directly on your phone.
Books from jyoti jwala
View all
You may also like:
सबनम की तरहा दिल पे तेरे छा ही जाऊंगा
सबनम की तरहा दिल पे तेरे छा ही जाऊंगा
Anand Sharma
विश्वास करो
विश्वास करो
TARAN VERMA
हो नये इस वर्ष
हो नये इस वर्ष
Dr. Rajendra Singh 'Rahi'
*काल क्रिया*
*काल क्रिया*
DR ARUN KUMAR SHASTRI
दो शे'र ( अशआर)
दो शे'र ( अशआर)
डॉक्टर वासिफ़ काज़ी
"सैनिक की चिट्ठी"
Ekta chitrangini
*जन्म या बचपन में दाई मां या दाया,या माता पिता की छत्र छाया
*जन्म या बचपन में दाई मां या दाया,या माता पिता की छत्र छाया
Shashi kala vyas
बात बात में लड़ने लगे हैं _खून गर्म क्यों इतना है ।
बात बात में लड़ने लगे हैं _खून गर्म क्यों इतना है ।
Rajesh vyas
*आई भादों अष्टमी, कृष्ण पक्ष की रात (कुंडलिया)*
*आई भादों अष्टमी, कृष्ण पक्ष की रात (कुंडलिया)*
Ravi Prakash
किस लिए पास चले आए अदा किसकी थी
किस लिए पास चले आए अदा किसकी थी
डॉ सगीर अहमद सिद्दीकी Dr SAGHEER AHMAD
शिर्डी के साईं बाबा
शिर्डी के साईं बाबा
Sidhartha Mishra
‌‌‍ॠतुराज बसंत
‌‌‍ॠतुराज बसंत
Rahul Singh
■ आज का दोहा
■ आज का दोहा
*Author प्रणय प्रभात*
अछूत....
अछूत....
सोलंकी प्रशांत (An Explorer Of Life)
आहटें।
आहटें।
Manisha Manjari
कान्हा मेरे जैसे छोटे से गोपाल
कान्हा मेरे जैसे छोटे से गोपाल
Harminder Kaur
ਸੰਵਿਧਾਨ ਦੀ ਆਤਮਾ
ਸੰਵਿਧਾਨ ਦੀ ਆਤਮਾ
विनोद सिल्ला
तुम गजल मेरी हो
तुम गजल मेरी हो
साहित्य गौरव
श्रृंगार
श्रृंगार
Neelam Sharma
कविता
कविता
Rambali Mishra
अंदाज़े शायरी
अंदाज़े शायरी
अनिल कुमार गुप्ता 'अंजुम'
उसकी गली तक
उसकी गली तक
Vishal babu (vishu)
ਮੁੰਦਰੀ ਵਿੱਚ ਨਗ ਮਾਹੀਆ।
ਮੁੰਦਰੀ ਵਿੱਚ ਨਗ ਮਾਹੀਆ।
Surinder blackpen
एक खाली बर्तन,
एक खाली बर्तन,
नेताम आर सी
मन के ढलुवा पथ पर अनगिन
मन के ढलुवा पथ पर अनगिन
Rashmi Sanjay
Ahsas tujhe bhi hai
Ahsas tujhe bhi hai
Sakshi Tripathi
फूल और कांटे
फूल और कांटे
अखिलेश 'अखिल'
24/230. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
24/230. *छत्तीसगढ़ी पूर्णिका*
Dr.Khedu Bharti
जहां आपका सही और सटीक मूल्यांकन न हो वहां  पर आपको उपस्थित ह
जहां आपका सही और सटीक मूल्यांकन न हो वहां पर आपको उपस्थित ह
Rj Anand Prajapati
दो शब्द यदि हम लोगों को लिख नहीं सकते
दो शब्द यदि हम लोगों को लिख नहीं सकते
DrLakshman Jha Parimal
Loading...